- अगस्त 2016 में शून्य मोबाइल ग्राहक आधार से शुरू होकर, जियो ने हरियाणा में जून 2026 तक 29.2% के सीएजीआर के साथ
- 82.7 लाख मोबाइल ग्राहकों को जोड़ा ट्राई
करनाल ब्रेकिंग न्यूज : रिलायंस जियो ने अपने कमर्शियल लॉन्च के बाद से एक दशक में, हरियाणा में, वायरलेस मोबाइल बाज़ार में एक बड़ी क्रांति ला दी है। जब सितंबर 2016 में जियो ने टेलीकॉम मार्केट में कदम रखा, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि कुछ ही वर्षों में पुरे उद्योग का चेहरा ही बदल जाएगा। जियो 5 सितंबर को अपने दस साल पूरे करने जा रहा है। हरियाणा टेलीकॉम सर्कल में अपने पहले दशक में, नेट मोबाइल सब्सक्राइबर्स जोड़ने के मामले में रिलायंस जियो निर्विवाद रूप से सबसे आगे रहा है। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) के अनुसार, अगस्त 2016 में शून्य ग्राहक आधार से शुरुआत करने वाले जियो ने हरियाणा में पहले ही महीने (सितंबर 2016) में 6.8 लाख ग्राहक जोड़ लिए थे। जून 2026 तक यह आंकड़ा 75.9 लाख की नेट ऐडीशन और 29.2 % के कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (सीएजीआर) के साथ बढ़ते हुए 82.7 लाख हो गया है। यह 29.2 % सीएजीआर पहले से मौजूद टेलीकॉम ऑपरेटरों से कहीं ज़्यादा है। ट्राई की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 तक, हरियाणा के 2.7 करोड़ मोबाइल कनेक्शनों में से 30.6% हिस्सेदारी जियो की है। इसके अलावा, हरियाणा के विशाल ग्रामीण और शहरी इलाकों में डिजिटल पहुंच को बढ़ावा देते हुए, जियो ने राज्य में 6.5 लाख परिसरों को जियो फाइबर और जियो एयर फाइबर सेवाओं से जोड़ा है। ये सेवाएं हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड और वर्ल्ड-क्लास होम एंटरटेनमेंट प्रदान करती हैं। हरियाणा में होम ब्रॉडबैंड सेगमेंट में जियो निर्विवाद रूप से मार्केट लीडर है।
जियो की जबरदस्त ग्रोथ के मुख्य कारण
पूरे देश में आज जियो के लगभग 53.33 करोड़ ग्राहक हैं, जिनमें 28.5 करोड़ 5जी ग्राहक शामिल हैं। जियो के लॉन्च से पहले, कॉल रेट और डेटा चार्ज ग्राहकों के लिए बड़ी समस्याऐं थीं। जियो ने किफायती डेटा और फ्री कॉलिंग की रणनीति अपनाकर कॉम्पिटिशन के एक नए दौर की शुरुआत की और ग्राहकों को उनकी इन दोनों चिंताओं से मुक्त कर दिया । एक दशक पहले, भारतीय ग्राहक मोबाइल डेटा का इस्तेमाल लगभग मेगाबाइट के हिसाब से नाप-तोलकर किया करते थे। आज देश में डेटा की खपत इतनी ज़्यादा है कि बहुत कम बाज़ार ही होंगे जो इसकी बराबरी कर सकें। इस बदलाव के पीछे जियो की एक बड़ी स्टोरी है, जो की कनेक्टिविटी को सस्ता बनाने से लेकर ऐसी टेक्नोलॉजी, डिवाइसेज़ और मज़बूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने तक का सफ़र है। 2016 में, भारत में प्रति सब्सक्राइबर औसत मासिक मोबाइल डेटा खपत 0.2 जीबी से कम थी। एक गीगाबाइट डेटा की कीमत लगभग 228 रुपये थी।
देश भर में एक्टिव 4जी और 5जी सब्सक्राइबर्स की संख्या बढ़कर लगभग 93.8 करोड़ हो गई है
1 करोड़ से भी कम भारतीयों की पहुंच 4जी नेटवर्क तक थी और औसत डाउनलोड स्पीड मुश्किल से लगभग 2.5 एमबीपीएस के आसपास पहुंचती थी। फिर आया जीयो । इसके बाद जो हुआ, वह सिर्फ़ एक टेलीकॉम प्राइस वॉर नहीं थी बल्कि इसने भारतीयों के इंटरनेट के साथ रिश्ते को ही बदल दिया। आज एक दशक बाद, एक गीगाबाइट की कीमत लगभग 7.9 रुपये है, जो करीब 97 प्रतिशत कम है। देश भर में एक्टिव 4जी और 5जी सब्सक्राइबर्स की संख्या बढ़कर लगभग 93.8 करोड़ हो गई है। जियो के नेटवर्क पर, एक एवरेज सब्सक्राइबर अब प्रति माह 42.3 जीबी डेटा इस्तेमाल करता है। टेलीकॉम नेटवर्क की पिछली पीढ़ियां ज़्यादातर इम्पोर्टेड प्रोप्राइटरी हार्डवेयर और सॉफ़्टवेयर पर आधारित थीं, जिसकी वजह से ऑपरेटर्स को न सिर्फ़ इक्विपमेंट के लिए, बल्कि टेक्नोलॉजी अपग्रेड और रोडमैप वगैरह के लिए भी विदेशी वेंडर्स पर निर्भर रहना पड़ता था। वहीं दूसरी ओर, जियो लगातार एक ऐसे एंड-टू-एंड, क्लाउड-नेटिव स्टैंडअलोन 5जी नेटवर्क को विकसित करने में भारी निवेश कर रहा है, जो भारत के टेरेन के हिसाब से सबसे उपयुक्त है।
I have been associated with the field of journalism for the past 10 years. While working in print media, I understood people’s issues at the grassroots level and conveyed their voices to the authorities. Readers today seek news that is both high-quality and engaging. To meet this need, the ‘Karnal Breaking News’ website will now provide the latest updates—covering national and international affairs, politics, sports, and news specific to Karnal—rapidly on a single platform.