- CJP का आज देशभर में प्रदर्शन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे
करनाल ब्रेकिंग न्यूज : पेपर लीक के खिलाफ अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक ने 27वें दिन भूख हड़ताल खत्म कर दी है। वे गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह गुरुवार रात करीब 12.30 बजे मेदांता पहुंचे।
नड्डा ने वांगचुक को जूस पिलाकर उनका अनशन खत्म कराया। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने वांगचुक से मुलाकात से पहले गृह मंत्री अमित शाह से भी चर्चा की थी।
वांगचुक ने X पर लिखा- कई राजनीतिक दलों के 65 सांसदों ने मुझसे अनशन खत्म करने की अपील की थी। लंबी बातचीत और कुछ शर्तों पर सहमति बनने के साथ-साथ देश में संभावित हिंसा की आशंका को देखते हुए मैंने यह फैसला लिया है।
वांगचुक ने 28 जून को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। हालत बिगड़ने पर उन्हें 18 जुलाई को सफदरजंग और फिर वहां से 21 जुलाई को मेदांता अस्पताल शिफ्ट किया गया था। वे नीट पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
CJP का आज देशभर में प्रदर्शन
CJP के 20 जून से NEET पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन का आज 35वां दिन है। प्रदर्शनकारी जवाबदेही तय करने और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। CJP ने आज देशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का ऐलान किया है। वहीं दिल्ली यूनिवर्सिटी ने भी अपने स्टूडेंट्स और प्रोफेसर्स को को चेतावनी दी है कि वे जंतर-मंतर न जाएं। उनपर कानूनी कार्रवाई हो सकती है, साथ ही उनके कॅरियर पर भी असर पड़ सकता है।
CJP के प्रदर्शन पर सरकार का रुख बदला: पहले सख्ती, अब बातचीत
करीब एक महीने में कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन राष्ट्रीय मुद्दा बन गया है। शुरुआती सख्ती के बाद अब सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रही है।
1. आंदोलन देश भर में फैला: सोनम वांगचुक के अनशन, छात्रों की लगातार मौजूदगी और कई राज्यों से मिले समर्थन ने प्रदर्शन को देशभर में फैला दिया है।
2. जन आंदोलन में तब्दील हो रहा: शुरुआती दिनों में सरकार ने बैरिकेडिंग, हिरासत और मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदियां लगाईं। बाद में कांग्रेस समेत विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने CJP का समर्थन किया। अब यह जन आंदोलन में बदलता दिख रहा है।
3. संसद मार्च के बाद सरकार का रुख बदला : 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। कई प्रदर्शनकारी और 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए। इसके बाद सरकार बातचीत के लिए तैयार हुई।
4. कांग्रेस के अचानक प्रदर्शन से सरकार घिरी: 21 जुलाई को राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सांसदों ने प्रधानमंत्री आवास के पास प्रदर्शन किया। केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह को बातचीत करने के लिए भेजा। विपक्ष अब सदन में पेपर लीक और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा है। संसद चल नहीं पा रही है। 5. CJP ने नड्डा के घर पर बातचीत से इनकार क्यों किया: 22 और 23 जुलाई को सरकार ने CJP को कई बार औपचारिक बातचीत का प्रस्ताव भेजा, लेकिन बैठक की जगह पर सहमति नहीं बन सकी। पहली बैठक 20 जुलाई को नड्डा के घर हुई थी। यह बेनतीजा रही थी।
यदि बातचीत फिर नड्डा के घर या ऑफिस में होती, तो प्रदर्शन पर BJP के साथ राजनीतिक बातचीत का ठप्पा लग सकता था।
CJP प्रदर्शन को लगातार छात्र आंदोलन बता रहा है। ऐसे में वह किसी राजनीतिक दल के दफ्तर में जाकर अपनी निष्पक्ष छवि कमजोर नहीं करना चाहता।
जंतर-मंतर या किसी न्यूट्रल वेन्यू पर मिलने से यह संदेश जाएगा कि बातचीत बराबरी की स्थिति में हो रही है।
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