करनाल ब्रेकिंग न्यूज : करनाल में मिठाई भंडारों में खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शहर के अधिकांश मिठाई भंडारों में मिठाइयों पर निर्माण तिथि और उपयोग की अंतिम तिथि दर्ज नहीं मिल रही है। इसके बावजूद पिछले पांच साल से संबंधित दुकानदारों के खिलाफ नोटिस और चालान की कार्रवाई नहीं होने का मामला सामने आया है। रिपोर्ट में विभाग की ओर से तर्क दिया गया है कि स्टेट कार्यालय से नोटिस और चालान का निर्धारित प्रोफार्मा उपलब्ध नहीं हुआ। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि नियमों का उल्लंघन हो रहा था, तो इतने लंबे समय तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई और ग्राहकों के हितों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए?
मिठाइयों की गुणवत्ता पर सवाल, ग्राहकों की सेहत से खिलवाड़ का खतरा
खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों के अनुसार, खुले में बिक्री के लिए रखी मिठाइयों के ट्रे और कंटेनर पर निर्माण तिथि और ‘बेस्ट बिफोर’ की जानकारी प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए हैं। मिठाई कितने समय तक खाने योग्य रहेगी, यह उसकी किस्म और रखरखाव की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। त्योहारी सीजन में मिठाइयों की मांग बढ़ने के कारण इस तरह की लापरवाही उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बन जाती है। पुरानी या अनुचित तरीके से रखी गई मिठाई खाने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए दुकानदारों की जिम्मेदारी है कि वे मिठाइयों की ताजगी, स्वच्छता और निर्धारित जानकारी का ध्यान रखें।
विभागीय कार्रवाई और जवाबदेही पर उठे सवाल
रिपोर्ट में बताया गया है कि नोटिस और चालान का प्रोफार्मा उपलब्ध नहीं होने के कारण कार्रवाई प्रभावित रही। लेकिन प्रशासनिक प्रक्रिया में बाधा होने की स्थिति में भी उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। संबंधित विभाग को नियमों के पालन की निगरानी, दुकानदारों को जागरूक करने और उल्लंघन मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई करने की आवश्यकता है।करनाल में खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी केवल मिठाइयों के सैंपल लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि दुकानों में स्वच्छता और खाद्य पदार्थों की उचित जानकारी सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है।
कौन-सी मिठाई कितने दिन तक उपयोग करने योग्य?
1. एक दिन तक
कलाकंद, बाटर स्कॉच कलाकंद, रोज कलाकंद और चॉकलेट कलाकंद।
2. दो दिन तक
दूध उत्पादन व मिल्क बादाम रसगुल्ला, रस मलाई, रबड़ी रसगुल्ला, मलाई टोस्ट, राजभोग, मलाई रोल, मलाई बर्फी, हिमानी व डोडा बर्फी, अनारकली, मोतीचूर, पिन्नी, रसकदम, रस कटोरी, बीर मोहन, गुड़ रस मलाई और गुड़ रसगुल्ला।
3. तीन दिन तक
मिल्क केक, पेड़ा, प्लेन बर्फी, मिल्क बर्फी, पिस्ता बर्फी, कलाकंद बर्फी, चॉकलेट बर्फी, सफेद पेड़ा, कोकोनट लड्डू, लाल लड्डू और मोतीचूर लड्डू।
4. सात दिन तक
बड़ी बूंदी ड्राई लड्डू, काजू कतली, घेवर, शक्करपारा, गुड़ पारा, शाही लड्डू, मूंग बर्फी, आटा लड्डू, ड्राई फ्रूट गुजिया, बूंदी लड्डू, काजू केसर बर्फी, काजू बादाम गुजिया, बादाम बर्फी, काजू बर्फी, केसर बर्फी, चॉकलेट घेवर, केसर घेवर, काजू लड्डू और काजू की अन्य मिठाइयां।
ग्राहकों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
– मिठाई खरीदते समय उसकी ताजगी और निर्माण तिथि की जानकारी लें।
– खुले में रखी मिठाइयों की साफ-सफाई और भंडारण पर ध्यान दें।
– बासी, बदबूदार या असामान्य रंग वाली मिठाई खरीदने से बचें।
– मिठाई की गुणवत्ता पर संदेह होने पर खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत करें।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि मिठाई की दुकानों पर नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था मौजूद है, तो पांच साल तक नोटिस और चालान की कार्रवाई क्यों नहीं हुई? संबंधित विभाग की जवाबदेही तय करना और उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।
25 हजार से 2 लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान
करनाल में मिठाई भंडारों के निरीक्षण के दौरान नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मिठाई भंडारों में मिठाइयों की निर्माण तिथि और एक्सपायरी या उपयोग की अंतिम तिथि दर्ज नहीं मिली। इसके चलते ग्राहकों को मिठाई की गुणवत्ता और उसके उपयोग की अवधि की सही जानकारी नहीं मिल पा रही है।
खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मिठाई विक्रेताओं को मिठाइयों की ट्रे और कंटेनर पर निर्माण तिथि व उपयोग की अंतिम तिथि प्रदर्शित करने के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इससे ग्राहक मिठाई खरीदते समय उसकी ताजगी और गुणवत्ता के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
रिपोर्ट में जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. कल्पना के हवाले से बताया गया है कि नियमों के उल्लंघन पर 25 हजार रुपए से लेकर 2 लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। हालांकि, जुर्माने की वास्तविक राशि संबंधित उल्लंघन और लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करेगी।
खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी है कि मिठाई की दुकानों पर नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए और ग्राहकों को सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध हों। इसके लिए नियमित निरीक्षण और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई जरूरी है।
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