October 27, 2026
26 oct 8

करनाल ब्रेकिंग न्यूज। देश में महंगे इलाज और दवाइयों की कीमतों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में अस्पतालों द्वारा दवाओं और मेडिकल सामग्री पर वसूले जा रहे भारी मार्जिन का मुद्दा उठाया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कुछ दवाओं पर 700 प्रतिशत तक और सर्जिकल व अन्य मेडिकल सामग्री पर 1,000 प्रतिशत तक मार्जिन का उल्लेख किया गया है। इससे मरीजों और उनके परिजनों पर इलाज का आर्थिक बोझ बढ़ने की चिंता सामने आई है।

कैंसर की दवाओं पर भी ऊंचे मार्जिन का मामला

केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अनुसार, अस्पताल कई बार ऐसी कंपनियों से दवाइयां खरीदते हैं, जो अधिक ट्रेड मार्जिन देती हैं। इसके बाद मरीजों को दवाइयां अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) पर बेची जाती हैं। इस व्यवस्था में खरीद मूल्य और बिक्री मूल्य के बीच बड़ा अंतर हो सकता है।

कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की कीमतें भी मरीजों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। महंगी दवाओं और लंबे इलाज के कारण कई परिवारों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

मेडिकल सामान पर भी भारी मार्जिन का आरोप

अस्पतालों में इलाज के दौरान इस्तेमाल होने वाली सर्जिकल सामग्री और अन्य मेडिकल उपकरणों के बिल भी चिंता का विषय हैं। बीमा या सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत इलाज में कई बार पैकेज के अनुसार भुगतान किया जाता है, जबकि खुद भुगतान करने वाले मरीजों को अलग-अलग सामान का बिल दिया जा सकता है।

ऐसे में मरीजों के लिए यह समझना मुश्किल हो जाता है कि किसी मेडिकल सामग्री की वास्तविक खरीद कीमत कितनी है और उसके लिए उनसे कितना शुल्क लिया जा रहा है।

NPPA करता है दवाओं की कीमतों की निगरानी

देश में दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) काम करता है। यह आवश्यक दवाओं की निर्धारित कीमतों की निगरानी करता है। सरकार ने कुछ कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन सीमित करने के कदम भी उठाए हैं, ताकि मरीजों को राहत मिल सके।

हालांकि, सभी दवाओं और मेडिकल सामग्रियों की कीमतों पर एक समान नियंत्रण लागू करना आसान नहीं है। अस्पतालों की बिलिंग व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं पर राज्यों की भूमिका और बीमा कंपनियों से भुगतान जैसे मुद्दे भी इसमें महत्वपूर्ण हैं।

मरीज इन बातों का रखें ध्यान

अस्पताल में इलाज के दौरान अनावश्यक खर्च से बचने और बिल में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मरीजों को कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए।

  • अस्पताल से दवाओं और मेडिकल सामग्री का अलग-अलग विवरण वाला बिल मांगें।
  • दवा का नाम, मात्रा, MRP और बिल में दर्ज कीमत की जांच करें।
  • दवाओं की निर्धारित कीमत जानने के लिए सरकारी Pharma Sahi Daam पोर्टल का इस्तेमाल करें।
  • अधिक कीमत वसूले जाने का संदेह होने पर बिल, दवा की पैकिंग और भुगतान के प्रमाण सुरक्षित रखें।
  • निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली की आशंका होने पर संबंधित प्राधिकरण के पास शिकायत दर्ज कराएं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *