मराठा वीरेंद्र की कांग्रेस में न ज्वाइनिंग हुई है और न ही उनकी पार्टी का कांग्रेस में विलय हुआ है- प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर

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हरियाणा कांग्रेस में ज्वाइनिंग के मुद्दे पर हुड्डा और एंटी हुड्डा खेमा एक बार फिर आमने-सामने है। पिछले दिनों एकता शक्ति पार्टी के अध्यक्ष मराठा वीरेंद्र सिंह की कांग्रेस में ज्वाइनिंग को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

पार्टी प्रदेशाध्यक्ष डॉ़ अशोक तंवर ने साफ कहा है कि न तो मराठा वीरेंद्र की कांग्रेस में ज्वाइनिंग हुई है और न ही उनकी पार्टी का कांग्रेस में विलय हुआ है। तंवर शनिवार को यहां प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे थे।

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पिछले दिनों दिल्ली स्थित अपने आवास पर हुड्डा ने मराठा वीरेंद्र व उनके समर्थकों को कांग्रेस में शामिल कराया था। यही नहीं, इसी दौरान वीरेंद्र सिंह ने एकता शक्ति पार्टी का भी कांग्रेस में विलय करने का ऐलान किया था। पार्टी में ज्वाइनिंग को लेकर यह पहला विवाद नहीं है।

इससे पहले भी हुड्डा ने जब इनेलो के पूर्व विधायक को कांग्रेस में शामिल कराया था तो तंवर ने उस पर आपत्ति जताई थी। यह मामला भी अभी तक अधर में ही लटका हुआ है। इसी तरह से पूर्व गृह राज्य मंत्री सुभाष बतरा को जब तंवर ने कांग्रेस में शामिल करवाया तो हुड्डा खेमे ने इस पर सवाल उठाए। यह मामला भी बीच में ही लटका हुआ है।


उन्होंने कहा, पार्टी में किसी की भी ज्वाइनिंग हो या फिर विलय हो उसका एक सिस्टम है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी को इस बारे में पहले सूचित किया जाता है, लेकिन मेरे पास इसकी कोई सूचना नहीं है। न ही मराठा वीरेंद्र सिंह द्वारा उनकी पार्टी का कांग्रेस में विलय किए जाने का कोई प्रस्ताव मिला है।

केंद्र की मोदी सरकार की चौथी वर्षगांठ पर ‘विश्वासघात’ नामक बुकलेट जारी करते हुए तंवर ने कहा, भाजपा का 4 साल का शासन राष्ट्रीय विश्वासघात का दौर रहा है। इन चार वर्षों में भाजपा ने समाज के सभी वर्गों से विश्वासघात किया है।


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