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सायंकालीन दयाल सिंह कालेज का नाम बदलकर वंदे मातरम किए जाने का देशभर में पुरजोर विरोध किया जा रहा है। उत्तर से लेकर दक्षिण तक विरोध का सिलसिला जारी है। हरियाणा में भी इसके विरोध की चिंगारी सुलगने लगी है। दयाल सिंह मजीठिया के नाम पर दिल्ली में बना दयाल सिंह सांयकालीन कालेज का नाम वहां की प्रबंधन बॉडी बदलकर वंदे मातरम कालेज करने जा रही है। इसका प्रस्ताव भी पारित कर दिया गया है। करनाल में दयाल सिंह कालेज के पूर्व विद्यार्थियों एवं मौजूदा विधार्थियों द्वारा हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा। इसके अलाला दयाल सिंह कालेज के पूर्व प्राचार्य डा. रामजीलाल तथा पूर्व प्राध्यापक डा. अबरोल जल्द ही मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मिलेंगे। इस मुद्दे को लेकर मानव सेवा संघ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए दयाल सिंह कालेज के पूर्व प्राचार्य डा. रामजीलाल तथा डा. अबरोल ने बताया कि 1958 में दयाल सिंह कालेज दिल्ली की इमारत बनी थी।
1959 में शुरू हुआ था। उस समय 13 एकड़ जमीन थी। इसमें इन दिनों 9 हजार विधार्थी पढ़ते है। जिनमें 6 हजार विधार्थी सुबह की शिफ्ट में तथा 3 हजार विधार्थी शाम के समय पढ़ाई करते है। उन्होंने बताया कि वंदे मातरम की आढ़ को लेकर सरकार दयाल सिंह कालेज को हड़पना चाह रही है। जबकि दयाल सिंह मजीठिया के पास 1889 में 30 लाख रुपए थे। जो टाटा से भी ज्यादा थे। लेकिन उन्होंने शिक्षा और समाज सेवा के कार्यो में पैसा लगाया। पंजाब यूनिर्वसिटी लाहौर में दयाल सिंह कालेज, करनाल और दिल्ली में बना कालेज उन्हीं की देन है। उनके नाम को बदलना उनका अपमान है। इसे सहन नहीं किया जाएगा। जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में पी.आई.एल दायर की जाएगी। उन्होंने बताया कि इसका विरोध उत्तर से लेकर दक्षिण में किया जा रहा है। कई केन्द्रीय मंत्री और सांसदों के साथ-साथ कई वरिष्ठ नेता और शिक्षाविद और समाजसेवी इसके विरोध में एकजुट है। 

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