July 25, 2024
 राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान में चल रहे फाउंडेशन प्रोग्राम की कड़ी में स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों में सम्प्रेषण कौशल (कम्युनिकेशन स्किल) विकसित करने के लिए प्रेरक व्याख्यानों का आयोजन किया गया। इसमें विख्यात प्रेरक वक्ता डा. फरहत उमर तथा डा. शिवा दुर्गा ने विद्यार्थियों को उत्तम सम्प्रेषण के टिप्स दिए।
संस्थान के निदेशक डा. आरआरबी सिंह ने बताया कि देश को बदलने के लिए युवाओं को आगे आना होगा। जबतक युवा एकजुट होकर आगे नहीं आएंगे, तब तक देश का न तो विकास होगा और न ही उसमें कोई बदलाव आ सकेगा। उन्होंने कहा कि भारत को युवा देश भी कहा जाता है। ऐसे में इसके उत्थान और विकास की जिम्मेदारी सीधे युवाओं के कंधों पर आ जाती है।  उन्होंने विद्याथियों को अपने आप में सॉफ्ट स्किल्स की कला को विकसित करने के गुर भी बताए तथा यह आह्वान किया कि संस्थान से दीक्षा प्राप्त करके जब वे देश-विदेश में जाएं तो अपनी शिक्षा, ज्ञान और कठोर परिश्रम की पराकाष्ठा से ज्ञान, विज्ञान, अनुसंधान एवं अपने-अपने कार्यक्षेत्र में सफलता का वरण करें।
डा. फरहत ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि एक अच्छा वक्ता होने से पहले अच्छा श्रोता होना जरूरी है। आपके शरीर की बॉडी लैंग्वेज, आंखों के संपर्क, हाथ के इशारे और दोस्ताना व्यवहार आपको दूसरों के साथ खुले तौर पर बोलने और एक-दूसरे से जुड्ने के लिए परस्पर प्रोत्साहित करती है। उन्होंने कहा कि अच्छे कम्यूनिकेशन स्किल के विकास में आत्मविश्वास सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
डा. शिवा दुर्गा ने कहा कि विज्ञान में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए सबसे पहले खुश होना जरूरी है। आप जो भी कार्य करें उसे खुशी से करें और अपने कार्य को आदत के रूप में बदलने का प्रयास करें।   उन्होंने कहा कि जीवन में सफल होने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना भी बहुत आवश्यक है।  इसके अलावा ज्ञान, इन्फ्रास्ट्रक्चर, प्रेरणा और आत्म-शक्ति  इन चार चीजों से आप किसी भी क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल कर सकते हैं।
डा. मीना मलिक ने कहा कि आत्म-प्रेरणा बड़ी उपलब्धि की ड्राइवर होती है और स्प-प्रेरणा आपको आपके सीनियर से, टीम लीडर से, किताबों से और अध्यात्मिक गुरूओं से प्राप्त होती है। अगर इन तमाम बातों को जीवन में धारण कर लिया जाए तो आपको उत्कृष्ट बनने से कोई नहीं रोक सकता। राकेश कुमार कुशवाहा, सहायक निदेशक राजभाषा ने विद्याथियों को यह बताया कि वे अपने आत्म-विश्वास, ईमानदारी एवं कठोर परिश्रम से जीवन में सफलता के आयाम रच सकते हैं।

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