- 300-400 रुपए कटौती के आरोप, 15 दिन से नहीं हुआ उठान
करनाल ब्रेकिंग न्यूज : करनाल जिले के घरौंडा की नई अनाज मंडी में धान की खरीद और उठान को लेकर किसानों व खरीद एजेंसियों के बीच विवाद सामने आया है। किसान यूनियन के नेताओं ने धान पर 300 से 400 रुपए तक की कटौती करने और गीले धान की खरीद में कथित मिलीभगत के आरोप लगाए। सोमवार को किसान नेताओं ने मार्केट कमेटी कार्यालय में तीनों खरीद एजेंसियों के इंस्पेक्टरों से जवाब मांगा। उनका आरोप है कि बारिश का फायदा उठाकर गीला धान 1900 से 2000 रुपए के भाव खरीदा गया, जबकि सूखा धान 15 दिन से मंडी में पड़ा है। किसानों ने 20 मॉश्चर तक के धान की उचित कटौती के साथ खरीद करने की मांग उठाई।
गीले धान की खरीद और उठान पर उठाए सवाल
किसान नेता जगदीप औलख, हैप्पी औलख और अन्य किसानों ने आरोप लगाया कि मंडी में खरीद प्रक्रिया सही तरीके से नहीं चल रही। उन्होंने हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन (एचडब्ल्यूसी) के इंस्पेक्टर सोनू पर भी कथित मिलीभगत के आरोप लगाए। जगदीप औलख का कहना है कि बारिश के दौरान गीला धान 1900 से 2000 रुपए प्रति क्विंटल के भाव खरीदा गया और उसे उठाने के लिए तुरंत ट्रक उपलब्ध करवा दिए गए।
दूसरी ओर, सूखा धान कई दिनों से मंडी में पड़ा है, लेकिन उसका उठान नहीं हो रहा।
किसान नेता ने आरोप लगाया कि सूखे धान में कथित तौर पर फायदा नहीं होने के कारण उसे प्राथमिकता नहीं दी जा रही। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अधिकारी 17 मॉश्चर तक का धान खरीदने की बात कहते हैं, तो ट्रकों में भरे धान की नमी की जांच क्यों नहीं करवाई जाती। उनके अनुसार, ट्रकों में लदे धान का मॉश्चर जांचने पर वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। यदि निर्धारित सीमा से अधिक नमी मिलती है, तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
इंस्पेक्टर सोनू ने आरोपों से किया इनकार
एचडब्ल्यूसी के इंस्पेक्टर सोनू ने कहा कि उन्होंने कटौती के संबंध में मिल मालिकों से कुछ नहीं कहा है। यदि कोई अनुचित कटौती कर रहा है, तो संबंधित व्यक्ति को पंचायत में बुलाकर बात की जानी चाहिए। सोनू के अनुसार, सेलर वालों को भी तीन बार बुलाया जा चुका है।
इस पर जगदीप औलख ने कहा कि मिल मालिकों को केवल एक बार बुलाया गया था और उस समय भी कोई नहीं पहुंचा। उन्होंने बताया कि सोमवार को एसडीएम के साथ बैठक हुई, लेकिन कोई फैसला नहीं हो सका। औलख का आरोप है कि मिल मालिक सूखे धान की ढेरियों को देखने नहीं आते और गीले धान की खरीद में अधिक रुचि दिखाते हैं। उन्होंने खरीद प्रक्रिया में मिलीभगत की आशंका जताई।
DFSC इंस्पेक्टर की खरीद बंद करने की चेतावनी
डीएफएससी एजेंसी के इंस्पेक्टर पुनीत ने कहा कि यदि उनकी एजेंसी का कोई मिल मालिक गलत काम करता पाया गया, तो खरीद तुरंत बंद कर दी जाएगी। उन्होंने इसकी जिम्मेदारी लेने की बात कही। वहीं, जगदीप औलख ने इंस्पेक्टर सोनू के उस कथन पर सवाल उठाया, जिसमें 17 मॉश्चर तक का धान खरीदने की बात कही जा रही है। औलख ने पूछा कि यदि नियमों के तहत ही खरीद हो रही है, तो गीले धान से भरे ट्रकों को उठाने की जिम्मेदारी किसकी है।
एसडीएम को मंडी में बुलाया
जगदीप औलख ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि कुछ लोग बारिश का फायदा उठाकर 1900 रुपए के भाव धान खरीद रहे थे। सोमवार सुबह भी किसानों के धान का भाव 2000 रुपए लगाया गया। किसान यूनियन ने किसानों को धान बेचने से रोका और एसडीएम को मंडी में बुलाया। औलख ने कहा कि बैठक में भी समस्या का समाधान नहीं निकल पाया।
300-400 रुपए कटौती सहन नहीं करेंगे किसान
जगदीप औलख ने कहा कि किसानों के धान पर 300 से 400 रुपए तक की कटौती किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कटौती के मामले में इंस्पेक्टरों की सहमति रहती है। उनके अनुसार, आढ़ती भी कटौती पर सहमत हैं, जबकि मिल मालिक भी इसमें रुचि रखते हैं।
किसान यूनियन ने एजेंसियों, मिल मालिकों और अन्य संबंधित लोगों से सही तरीके से खरीद करने का आश्वासन मिलने की बात कही। औलख ने चेतावनी दी कि यदि दोबारा ऐसी स्थिति बनी तो यूनियन विरोध करेगी।
मंडी प्रधान बोले- सीजन में आती रहती हैं समस्याएं
मंडी प्रधान जयभगवान गोयल ने कहा कि धान के सीजन में इस तरह की समस्याएं आती रहती हैं। जो भी कमी सामने आती है, उसे तुरंत दूर करवाने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने कहा कि आपसी सहमति से तय व्यवस्था के अनुसार ही धान खरीदा जाएगा। उनके अनुसार, विवाद कटौती का नहीं, बल्कि मॉश्चर का है। यदि कोई किसान ज्यादा गीला धान लेकर आता है, तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित पक्ष की होगी। उन्होंने मिलों की कमी को भी परेशानी का कारण बताया।
सचिव ने बताए आवक, खरीद और उठान के आंकड़े
मंडी सचिव सुनील कुमार ने कहा कि मंडी की स्थिति ठीक है। उनके अनुसार, अब तक मंडी में 2 लाख 60 हजार की आवक हो चुकी है, जबकि 1.28 लाख की खरीद और 46 हजार की लिफ्टिंग हुई है। उन्होंने कहा कि जिस एजेंसी के पास मिल नहीं है, उसे एक या दो मिल उपलब्ध करवाए जाएंगे, ताकि खरीद और उठान की व्यवस्था सुचारु रूप से चल सके।
I have been associated with the field of journalism for the past 10 years. While working in print media, I understood people’s issues at the grassroots level and conveyed their voices to the authorities. Readers today seek news that is both high-quality and engaging. To meet this need, the ‘Karnal Breaking News’ website will now provide the latest updates—covering national and international affairs, politics, sports, and news specific to Karnal—rapidly on a single platform.