October 11, 2026
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  • महासाध्वी प्रमिला  ने दिया भक्ति का संदेश

करनाल। इंद्री रोड स्थित घंटाकर्ण महावीर तीर्थस्थान पर महाप्रभावी श्री घंटाकर्ण महावीर देवता के विशेष कृपा दिवस कृष्ण चौदस के अवसर पर भक्ति संगम का आयोजन श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ किया गया। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से घंटाकर्ण बीजमंत्र का जाप कर लोकमंगल और सभी के कल्याण की कामना की।

इस अवसर पर साध्वी जागृति, पुष्पा गोयल, सुधा जैन, दिनेश जैन, प्रवीण जैन और सरिता जैन सहित श्रद्धालुओं ने सुमधुर भक्ति गीत प्रस्तुत किए। भजनों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

भक्ति से मिलती है दिव्य शक्तियों की कृपा : महासाध्वी प्रमिला

महासाध्वी प्रमिला  महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि भक्ति परमात्मा और दिव्य शक्तियों की कृपा रूपी ऊर्जा प्राप्त करने का सर्वोत्तम माध्यम है। निष्काम भाव से की गई भक्ति विशेष रूप से फलदायी होती है। जिस प्रकार मां अपनी संतान पर वात्सल्य बरसाती है, उसी प्रकार दिव्य शक्तियां भी अपने भक्तों पर कृपा करती हैं।

उन्होंने कहा कि श्री घंटाकर्ण भक्त वत्सल और कृपानिधान देवता हैं, जो अपने भक्तों पर वात्सल्य बरसाते हैं। उनकी आराधना श्रद्धालुओं को विश्वास, साहस और विपरीत परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा देती है।

जैन, हिंदू और बौद्ध परंपराओं में विशेष स्थान

महासाध्वी जी ने श्री घंटाकर्ण महावीर देवता की धार्मिक मान्यताओं और महिमा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उन्हें 52 वीरों में तीसवें वीर शिरोमणि तथा वीरों की परिषद में सेनापति का गौरवपूर्ण स्थान प्राप्त है। जैन परंपरा में उन्हें भगवान महावीर के शासन रक्षक देव के रूप में पूजा जाता है। वहीं, वैदिक परंपरा में भी उनसे जुड़ी विभिन्न धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं।

उन्होंने बताया कि मंत्र शास्त्रों में श्री घंटाकर्ण देवता के मंत्रों और साधना-विधियों का उल्लेख मिलता है। श्रद्धालु इनकी आराधना मनोरथ पूर्ति, संकल्प सिद्धि, भय निवारण और संकटों से मुक्ति की कामना के साथ करते हैं।

कार्यक्रम में लोककल्याण की भावना से बृहत् घंटाकर्ण स्तोत्र का पाठ किया गया। इसके बाद आरती और प्रीतिभोज का आयोजन हुआ। आरती एवं प्रीतिभोज की सेवा का लाभ संजीव-सपना जैन, वल्लभ विहार, रोहिणी, दिल्ली ने लिया।

पीयूष मुनि  महाराज के जन्मदिवस पर सेवा कार्य

संत गौरव पीयूष मुनि  महाराज के 51वें जन्मदिवस के अवसर पर श्रद्धालुओं की ओर से अस्पतालों और अन्य स्थानों पर विशेष सेवा कार्य भी किए गए। कार्यक्रम का समापन श्रद्धा, भक्ति और लोककल्याण की भावना के साथ हुआ।

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