- नई गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम लाने की तैयारी
करनाल ब्रेकिंग न्यूज : अब आप अपने सोने को बैंक लॉकर की तरह ज्वेलर्स (सर्राफा व्यापारी) के पास भी जमा कर सकेंगे। खास बात ये है कि इससे आपको 2.5% तक का ब्याज भी मिल सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार अगले दो हफ्तों के में एक नई और अपडेटेड ‘गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम’ का एलान कर सकती है।
नई स्कीम में देशभर के सराफा व्यापारियों को ‘कलेक्शन पार्टनर्स’ के रूप में शामिल किया जा सकता है, जिससे वे आम लोगों से सोना जमा कर सकेंगे। इससे पहले सिर्फ बैंकों को ही सोना जमा करने की अनुमति थी।
सरकार का यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील के बाद आया है, जिसमें उन्होंने देश के लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने की बात कही थी।
नई स्कीम से 1000 टन सोना जुटाने की उम्मीद
ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) ने कहा है कि नए फ्रेमवर्क के तहत ज्वेलर्स को कलेक्शन पार्टनर बनाने से घरों में रखे सोने को इकट्ठा करने में तेजी आएगी। इससे उम्मीद है कि सरकार बाजार से 1000 टन से ज्यादा सोना जुटा सकेगी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर भारतीय परिवारों के पास मौजूद कुल सोने का सिर्फ 5% हिस्सा भी इस नई स्कीम में जमा होता है, तो इससे देश के बाजार में करीब 90 अरब डॉलर (लगभग 8.57 लाख करोड़ रुपए) की नकदी आ सकती है। इससे भारत को 2 साल तक बाहर से सोना नहीं मंगाया पड़ेगा, डॉलर की मांग घटेगी और भारतीय रुपया मजबूत होगा।
भारतीय घरों और मंदिरों में 50,000 टन सोना रखा
भारतीय व्यापारियों के संगठन एसोचैम (द एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया) की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय घरों और मंदिरों में 50,000 टन सोना रखा है, जिसकी वैल्यू करीब 10 ट्रिलियन डॉलर यानी लगभग ₹830 लाख करोड़ है।
यह दुनिया के सबसे बड़े 10 सेंट्रल बैंकों के कुल भंडार से भी ज्यादा है। भारतीयों के पास इतना सोना है कि अमेरिका और चीन को छोड़कर दुनिया के लगभग हर देश की सालाना GDP से भी ज्यादा है।
भारत ने हर महीने ₹57 हजार करोड़ खर्च कर 60 टन सोना खरीदा
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड कंज्यूमर है। वित्त वर्ष 2026 में भारत ने हर महीने औसतन 60 टन सोना आयात किया है। इस पर हर महीने करीब 6 बिलियन डॉलर यानी करीब 57 हजार करोड़ रुपए का खर्च आया है।
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