करनाल ब्रेकिंग न्यूज : कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ गौरव कंबोज ने बताया कि आज 21 जून 2026 को कॉलेज के प्रांगण में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस बड़ी धूमधाम से मनाया गया। जिसमें संस्थान के निदेशक डॉक्टर महेंद्र कुमार गर्ग, डॉ प्रेरणा अग्रवाल, डॉ संदीप गिरी, विक्रांत चौहान सहित अन्य सभी चिकित्सक, स्टाफ, अधिकारी, कर्मचारी तथा विद्यार्थी उपस्थित रहे। इन सब ने मिलकर सामूहिक रूप से 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रोटोकॉल का अभ्यास किया।
इस विशेष योग प्रशिक्षण सत्र का संचालन अंगिरा गुरुकुल संस्थान करनाल की संस्थापिका एवं निर्देशिका डॉक्टर दीपिका द्वारा कराया गया। डॉक्टर दीपिका ने पवित्र ‘ॐ’ ध्वनि के उच्चारण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया, जिसके बाद उपस्थित सभी लोगों को आसन, प्राणायाम और ध्यान का गहन अभ्यास कराया गया। मंच पर योग क्रियाओं का सजीव प्रदर्शन दिव्या पुंज और गौरव द्वारा किया गया, जिसमें निर्वाण दत्ता ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई।
योग का चिकित्सीय दृष्टिकोण
योग अभ्यास के दौरान डॉक्टर दीपिका ने विभिन्न वर्गों के लिए योग के महत्व को समझाते हुए इसका चिकित्सीय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया:
तनाव में कमी (ऑटोमेटिक नर्वस सिस्टम): योग और प्राणायाम (जैसे अनुलोम-विलोम) शरीर में ‘शांत और शिथिल’ करने वाले तंत्र (पैरासिंपैथेटिक नर्वस सिस्टम) को सक्रिय करते हैं। यह तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन कोर्टिसोल के स्तर को कम करता है, जिससे मानसिक शांति मिलती है।
मस्तिष्क स्वास्थ्य और एकाग्रता: भ्रामरी प्राणायाम और ध्यान के दौरान मस्तिष्क में अल्फा वेव्स उत्पन्न होती हैं। यह मस्तिष्क की कार्यप्रणाली (न्यूरोप्लास्टिसिटी) में सुधार कर विद्यार्थियों और डॉक्टरों की स्मरण शक्ति और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को बढ़ाता है।
अत्यधिक थकान (बर्नआउट) से बचाव : डॉक्टरों और प्राध्यापकों पर मरीजों की गंभीर स्थिति और लंबे समय तक कार्य करने का भारी दबाव रहता है। ध्यान और सूर्य नमस्कार शरीर में प्रसन्नता देने वाले तत्वों (एंडोर्फिन) को बढ़ाते हैं, जिससे मानसिक थकान दूर होती है और कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है।
रीढ़ और मांसपेशियों का स्वास्थ्य (मस्कुलोस्केलेटल हेल्थ): घंटों एक ही जगह बैठकर काम करने से कर्मचारियों में सर्वाइकल, पीठ दर्द और नाभि के खिसकने जैसी समस्याएँ हो जाती हैं। सूक्ष्म क्रियाएं, ताड़ासन और पवनमुक्तासन रीढ़ की हड्डी का लचीलापन बढ़ाते हैं और शारीरिक सुस्ती को तत्काल दूर करते हैं।
हर आयु वर्ग के लिए रक्षा कवच: योग युवाओं के शारीरिक विकास व हार्मोंस के संतुलन, कामकाजी वर्ग के जीवन संतुलन (वर्क लाइफ बैलेंस) और बुजुर्गों को जोड़ों के दर्द व अनिद्रा (इंसोमनिया) से राहत दिलाने में सहायक है।
मुख्य संदेश एवं निष्कर्ष
डॉ गौरव कंबोज ने बताया कि “हमें योग और अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को केवल एक दिन के उत्सव या आयोजन तक सीमित नहीं रखना चाहिए। योग को अपने दैनिक जीवन में प्रतिदिन अपनाना बेहद आवश्यक है। जब योग हमारी जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बनेगा, तभी हम इसके वास्तविक शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लक्ष्य को प्राप्त कर सकेंगे।”
संस्थान के निदेशक डॉक्टर एम के गर्ग ने कार्यक्रम के समापन पर संदेश देते हुए बताया कि दैनिक दिनचर्या में से कम से कम 45 मिनट प्रतिदिन योग को समर्पित करना आपके पूरे जीवन को बदल सकता है और कार्यस्थल पर आपकी कार्यक्षमता को कई गुना बढ़ा सकता है।