नृत्यांगना गीता चंद्रन ने एनडीआरआई में बिखरे भारतीय संस्कृति के रंग

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राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान में स्टाफ क्लब एवं विद्यार्थी परिषद की ओर से भरतनाट्यम शास्त्रीय नृत्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पद्दमश्री गीता चन्द्रन ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। कार्यक्रम में जहां छात्रों को भारतीय परंपरा को चिन्हित करने वाली नृत्य पद्धति की विशेषताओं को जानने का मौका मिला, वहीं पद्दमश्री गीता चन्द्रन ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य भरतनाट्यम के माध्यम से विभिन्न प्रसंगों को अपनी प्रस्तुति से साकार किया। पुष्पांजलि प्रस्तुति से उन्होंने मां सरस्वती को नमन किया। कार्यक्रम को चार चांद लगाने में मंच पर की गई विशेष लाइटिंग की भी मुख्य भूमिका रही। उन्होंने गीत में आने वाले शब्दों को अपने हाथ और पैर की मुद्राओं और चेहरे के भावों से पेश किया।

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इस अवसर पर स्पिक मैके संस्था से पद्दमश्री डा. किरन सेठ ने भी शास्त्रीय नृत्य के बारे में विद्यार्थियोंं को बताया। डा. सेठ बताया कि स्पिक मैके एक गैर-लाभकारी, स्वैच्छिक, गैर-राजनीतिक संस्था है, जो कि विभिन्न सम्मेलनों, बैठकों, व्याख्यान और संगीत उत्सवों के माध्यम से शास्त्रीय संगीत, भारतीय शास्त्रीय नृत्य तथा भारतीय संस्कृति को बढ़ावा दे रही है।

एनडीआरआई के निदेशक डा. आरआरबी सिंह ने कहा कि आज की युवा पीढी भारतीय संस्कृति से दूर होती जा रही है। युवाओं पर पश्चिमी सभ्यता का असर साफ देखने को मिल रहा है। ऐसे में गीता चंद्रन लोगों को भारतीय संस्कृति से जोडऩे का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया वे  नृत्यांगना गीता चंद्रन से प्ररेणा लेकर भारतीय संस्कृति से जुड़े।

स्टाफ क्लब के इंचार्ज डा. गौतम कौल ने कार्यक्रम में आने पर सभी का स्वागत किया और कहा कि वर्तमान युवा पश्चिमी कला की ओर ज्यादा आकर्षित होते हैं, क्योंकि उन्हें भारतीय कला और पद्धति की जानकारी कम मिल रही है। इसलिए संस्थान द्वारा समय समय पर इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन करके युवाओं को भारतीय संस्कृति से जोडऩे का प्रयास किया जा रहा है। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डा. आरआरबी सिंह मुख्य अतिथियों को स्मृति चिंह भेंट कर उन्हें सम्मानित किया। इस मौके पर संयुक्त निदेशक प्रशासनिक सुशांत शाह, डा. एसके तोमर, डा. स्मिता सिरोही, डा. जेके कौशिक, विद्यार्थी्र परिषद की प्रधान शिवानी सहित अन्य वैज्ञानिक एवं विद्यार्थीण मौजूद रहे।


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