हरियाणवी मूवी छोरियां छोरों से कम नहीं होती ने मचाई धूम

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  • फिल्म इंडस्ट्री में छाया करनाल का छोरा शिवम शर्मा
  • हरियाणवी मूवी छोरियां छोरों से कम नहीं होती ने मचाई धूम
  • बड़े पर्दे पर बादशाह, विक्रमजीत विर्क, रोबिन सोही और रोमिल चौधरी की बढ़ रही सक्रियता

करनाल। फिल्म इंडस्ट्री में करनाल के छोरों ने धमाल मचा दिया है। बड़े पर्दों पर बढ़ती सक्रियता से क्षेत्र का बोलबाला हो गया है। मशहूर रेपर बादशाह, अभिनेता विक्रमजीत विर्क, अभिनेता रोबिन सोही और बीग बॉस कांटेस्टेंट रोमिल चौधरी के बाद हाल ही में रिलीज हुई जी स्टूडियो और सतीश कौशिक एंटरटेनमेंट की फिल्म छोरियां छोरों से कम नहीं होती में सेक्टर-13 के मकान नंबर 2248 निवासी आरटीआई एक्टीविस्ट एडवोकेट राजेश शर्मा के पुत्र शिवम शर्मा की मूवी ने धूम मचा दी है। इंडस्ट्री में शिवम शर्मा को कबीर के नाम से जाना जाता है और उनके कई स्टेज शो हाे चुके हैं। फिल्म में खास यह है कि शिवम शर्मा कबीर रेपर, गीत लेखक व अभिनेता तीनों की भूमिका में हैं।

देशभर में एकसाथ रिलीज हुई इस मूवी ने दो दिन में ही धूम मचा दी है। सामाजिक तानेबाने पर बनी इस मूवी की जमकर सराहना हो रही है। मूवी में करनाल के ही जाने-माने ज्योतिषाचार्य दीपक पंडित वकील की भूमिका में हैं। शिवम की मां सरिता शर्मा प्रताप पब्लिक स्कूल में टीचर हैं और छोटा भाई सत्यम शर्मा क्रिकेटर हैं।

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आमिर खान, गीता फौगाट और बबीता फौगाट की फिल्म दंगल का एक डॉयलॉग बड़ा फेमस हुआ था… ‘म्हारी छोरियां छोरों से कम हैं के’ यह डायलाग अभी तक लोगों के दिलोदिमाग से उतरा भी नहीं था कि इस पर पूरी फिल्म ही बना दी गई। एक साल में कम से कम तीन हरियाणवी फिल्में बनाने का इरादा रखने वाले बॉलीवुड के निर्माता निर्देशक एवं एक्टर सतीश कौशिक ने यह कमाल कर दिखाया है।

हरियाणवी कल्चर पर आधारित इस फिल्म का नाम है ‘रे ताऊ…छोरियां छोरों से कम नहीं होती’। हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और चंडीगढ़ समेत कई राज्यों में 17 मई को फिल्म बड़े परदे पर रिलीज हुई है। तनु वेड्स मनु, दंगल और सुल्तान के बाद ‘छोरियां छोरों से कम नहीं होती’ ऐसी फिल्म है, जिसकी पूरी शूटिंग हरियाणा के अलग-अलग शहरों में हुई है। अधिकतर कलाकार भी हरियाणा के हैं। यूपी, बिहार और राजस्थान में अपने लटके-झटकों से गदर मचा देने वाली हरियाणवी डांसर सपना चौधरी का एक गाना इस फिल्म में रखा गया है। ‘मेरे यार सुदामा रे’ गीत गाकर सुर्खियों में आई विधि देशवाल ने इस फिल्म में हीरोइन के बचपन का रोल निभाया है। सतीश कौशिक इस बच्ची की आवाज से काफी प्रभावित हैं।

यह मूवी सतीश कौशिक एंटरटेनमेंट और जी स्टूडियो ने मिलकर तैयार की है। फिल्म में सतीश कौशिक स्वयं लीड रोल में हैं, जो पिता की भूमिका निभा रहे। रश्मि सोमवंशी बेटी के किरदार में हैं, जबकि अनिरुद्ध दवे फिल्म में रश्मि के दोस्त हैं। चरखी दादरी के संजीव रामफल और करनाल के एस्ट्रोलाजर दीपक पंडित इस फिल्म में एडवोकेट की भूमिका में हैं।

संजीव रामफल ऐसे कलाकार हैं, जिन्होंने मुंबई में कड़ा संघर्ष किया है और अब हरियाणा में कई बड़े सामाजिक कार्यों को समर्पित हैं, जबकि दीपक पंडित फिल्म स्टार अमिताभ बच्चन समेत कई बड़ी फिल्मी हस्तियों के ज्योतिषी हैं। अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय की शादी में दीपक पंडित फेरे करा चुके हैं।

एमडीयू रोहतक में युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा कल्याण विभाग के डायरेक्टर बोल तेरे मीठे-मीठे फेम जगबीर राठी ने भी फिल्म में अहम भूमिका निभाई है। मूलरूप से महेंद्रगढ़ के रहने वाले सतीश कौशिक की इस हरियाणवी फिल्म में हिसार की सोनाली फौगाट, जानवी सांगवान, गौतम सौगात, मोहनकांत, प्रकाश घई, राजू पंजाबी, विकास कुमार शर्मा, छोटी बच्ची तन्नू और सुकृति शर्मा ने भी अलग-अलग भूमिकाएं निभाई हैं।

इन सभी हरियाणवी कलाकारों को पहली बार बड़े परदे का शानदार प्लेटफार्म मिला है। यह फिल्म बाप-बेटी के इर्द-गिर्द घूमती है। दंगल में भी कुछ ऐसा ही था। उसमें आमिर को बेटा चाहिए था। इसमें भी सतीश कौशिक को बेटा चाहिए पर इस फिल्म में पिता की मर्ज़ी के खिलाफ जाकर बेटी अपना करियर बनाती है। फिल्म में रश्मि सोमवंशी एक आइपीएस अधिकारी है।

फिल्म एक्ट्रेस स्वरा भास्कर और एक्टर अनिल कपूर ने सतीश कौशिक की इस तरह की फिल्म बनाने को लेकर सराहना की है। फिल्म का निर्देशन राजेश अमरलाल बब्बर ने किया। यह फिल्म हरियाणा की बेटी के संघर्ष की कहानी बयां करती है। पिता नहीं चाहता कि बेटी पढ़े लेकिन फिर भी वह टॉप करती है और आइपीएस बनने के ख्वाब बुनकर उन्हें पूरा करती है। आखिर में पिता को मानना पड़ता है कि छोरियां छोरों से कम नहीं होती।

सतीश कौशिक का कहना है कि हरियाणा की फिल्म पॉलिसी जल्द लागू होने वाली है। इससे हरियाणवी फिल्म इंडस्ट्री को स्थापित होने में मदद मिलेगी। आज करीब हर राज्य की फिल्में दर्शकों को आकर्षित कर रही हैं। यहां तक की मेघालय की फिल्में भी दर्शकों को लुभा रही हैं। हरियाणा को इस दौड़ में पिछडऩा नहीं चाहिए। हमारी यह फिल्म नए आंदोलन की शुरुआत है, जो हरियाणवी कल्चर को बड़े मुकाम पर पहुंचाएगा। मेरी इच्छा है कि हमारी कंपनी बी सतीश कौशिक एंटरटेंमेंट साल में कम से कम तीन हरियाणवी फिल्म बनाए, ताकि प्रदेश की फिल्मों और यहां के कलाकारों का बढ़ावा मिल सके। ऐसा प्रावधान भी करने की योजना है कि हरियाणा के सभी थियेटर इन फिल्मों को दिखाएं।


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