3 साल की उम्र में ही दिमाग बन गया था कैलकुलेटर जैसा, आज भारत में जानी जाती है इंसानी कंप्यूटर के रूप में।

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3 साल की उम्र में ही दिमाग बन गया था कैलकुलेटर जैसा, आज भारत में जानी जाती है इंसानी कंप्यूटर के रूप में।

पाठको, भारत में गणित के इतिहास से तो शायद आप सब वाकिफ है और शायद यही कारण है की भारत में आपको एक से एक गणित के जानकार मिलेंगे। लेकिन क्या ऐसा हो सकता है की कोई शक्श न कभी पढ़ा हो और न कभी स्कूल या कॉलेज गया हो लेकिन उनका गणित का ज्ञान ऐसा की सब हैरत में पड़ जाएं।

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ऐसी ही एक महिला थी जिनका नाम था शकुन्तला देवी जो कर्नाटक से थी। उनका जन्म 4 नवम्बर 1929 को कर्नाटक की राजधानी बंगलुरु में एक कन्नड ब्राह्मण परिवार में हुआ था।

इनके पिता सर्कस में एक कलाकार थे जब 3 साल की उम्र में इनके पिता जब शकुंतला देवी को एक कार्ड की ट्रिक सिखा रहे थे उस वक्त उनके पिता ने जाना कि उनकी बेटी के पास एक अद्भुत हुनर (नंबरों को याद रखने की क्षमता) है जिसे देखकर वह काफी आश्चर्यचकित हुए।

उनके इस हुनर को जानने के बाद उनके पिता छोटे-छोटे शो करने लगे जिसमें भी लोग यह देखकर हैरान हो गए कि कैसे एक छोटी सी बच्ची गणित की बड़ी से बड़ी समस्या को हल कर रही है।

6 वर्ष की आयु में, उन्होंने मैसूर विश्वविद्यालय में एक गणित प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। सबसे ज्यादा लोग यह बात जानकर हैरान थे कि उन्होंने किसी भी विश्वविद्यालय या स्कूल से कोई भी डिग्री या पढ़ाई नहीं की थी लेकिन इसके बावजूद वे गणित की समस्या हल करने में काफी माहिर थी।

वर्ष 1950 में, शकुन्तला देवी ने अपनी अंकगणितीय प्रतिभा का प्रदर्शन करने के लिए यूरोप का दौरा किया और वर्ष 1976 में उन्होंने न्यूयॉर्क शहर में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया और वर्ष 1988 में, कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले में मनोविज्ञान के प्रोफेसर आर्थर जेन्सेन द्वारा शकुन्तला की क्षमताओं का अध्ययन किया गया। जहां जेन्सेन ने बड़ी संख्या की गणना सहित उनके सभी कई कार्यों के प्रदर्शन का परीक्षण किया।

1980 में, इम्पीरियल कॉलेज ऑफ़ लंदन में उन्होंने दो 13 अंकों की संख्या को केवल 28 सेकंड में सही ढंग से गुणा किया। ये गुना इसलिए भी हैरत में डालती है क्यूंकि इस 26 सेकंड्स में हि नंबरों को पढ़ने का समय भी है।

संख्या 7,686,369,774,870 और 2,465,099,745,779 – एक कंप्यूटर द्वारा रैंडम्ली चुने गए थे और इन दो 13 अंकों की संख्या को शकुंतला देवी ने सिर्फ 28 सेकंड में गुना किया था और इन दो नंबरों की गणना है: 18,947,668,177,995,262,772,773,730

है ना हैरान कर देने वाली बात आज भी उनके कई किससे ऐसे हैं जिसे सुनकर लोग हैरत में पड़ जाते हैं अगर खबर अच्छी लगे तो कृपया शेयर ज़रूर कीजियेगा।

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