समाधानांचल ने निर्मल कुटिया गौशाला में लगाई चार त्रिवेणियां

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समाधानांचल की राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट संतोष यादव द्वारा चलाए जा रहे त्रिवेणी लगाने के पूण्य कार्य को आगे बढ़ाते हुए आज न्यूरो सर्जन डा. रोहित गोयल के प्रयासों से सैक्टर-32 स्थित निर्मल कुटिया गौशाला में चार त्रिवेणियां लगाई गई। यह सभी त्रिवेणियां निर्मल कुटिया के बाबा सरपंच महाराज जी के सानिध्य में एवं चमड़ी रोग विशेषज्ञ डा. सिया गोयल की उपस्थिति में लगाई गई। इस दौरान लोगों को अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया गया।

इस अवसर पर डा. रोहित गोयल ने 336वीं त्रिवेणी लगाते हुए कहा कि ऐसी लोक मान्यता है कि त्रिवेणी में ब्रह्मा, विष्णु और महेश निवास करते हैं और जहां त्रिवेणी लगी होती है वहां हमेशा देवी-देवताओं का वास होता है। उन्होंने कहा कि हिन्दु धर्म में त्रिवेणी का विशेष महत्व है और जब यह त्रिवेणी बड़ी होती है तो व्यक्ति इसे भगवान के रुप में पूजता हैं। उन्होंने कहा कि त्रिवेणी बड़, नीम व पीपल के संगम का नाम है जिसमें ब्रह्मा-विष्णु-महेश का निवास होता है, ऐसी लोक मान्यता है। उन्होंने कहा कि यह त्रिवेणी कोई साधारण वृक्ष नहीं बल्कि इसका आध्यात्मिक महत्व है।

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डा. देवेन्द्र यादव ने कहा कि यदि वृक्षों का संरक्षण और नए पौधों का रोपण नहीं किया गया तो हमारी आने वाली पीढिय़ां शुद्ध वायु के लिए तरस जायेंगी। पूरी मानवता के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो जाएगा। इसलिए हम सभी को पर्यावरण के प्रति सचेत हो जाना चाहिए और भावी पीढ़ी के लिए बेहतर विश्व का निर्माण करना चाहिए। पर्यावरण के असंतुलन से मानव मात्र के अस्तित्व पर या यूं कहें कि जीव मात्र के अस्तित्व पर, संपूर्ण पृथ्वी के अस्तित्व पर संकट आ खड़ा हुआ है और इसे बचाने का अहम दायित्व वर्तमान पीढ़ी का है।

हम यह जानते हैं कि जलवायु और पर्यावरण सभी के सांझे सरोकार है और इन सांझे सरोकारों के प्रति कर्तव्यों का निर्वहन करना भी हम सभी का सामूहिक दायित्व है और इसी के लिए ही हमने यह त्रिवेणी लगाने की मुहिम छेड़ी है जो ग्लोबल वार्मिंग को रोकने में भी मील का पत्थर साबित होगी।

इस मौके पर एडवोकेट परविन्द्र सिंह ने कहा कि त्रिवेणी को शास्त्रों में यज्ञ की संज्ञा दी गई है। जहां त्रिवेणी लगी होती है वहां हर पल, हर क्षण सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता रहता है। हर वह इंसान जो श्रद्धा भाव से, आध्यात्मिक भाव से इस त्रिवेणी को लगाता है या लगवाता है या इसका पालन-पोषण करता है, उसका कोई भी सात्विक कर्म विफल नहीं होता। त्रिवेणी हमें अपनी जड़ों व अपनी संस्कृति से जुड़े रहने का संदेश देती है।

त्रिवेणी अर्थात बड़, नीम व पीपल वायुमंडल से कार्बनडाइऑक्साइड, धूलकणों और ध्वनि का अवशोषण कर व सर्वाधिक प्राणवायु ऑक्सीजन प्रदाता के रूप में वर्तमान व भावी पीढिय़ों के लिए वरदान साबित होती है। इस अवसर पर रिया, रॉयल, राजीव एवं गौशाला का पूरा स्टाफ उपस्थित रहा।

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