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Live – देखें – Police Crime & FSL News – अब नही हो पाएगी फोरेंसिक सैंपल {सबूतों} के साथ छेड़छाड़ , हरियाणा में बारकोर्डिंग के माध्यम से फोरेंसिक सेम्पल रहेंगे सुरक्षित नही कर पायेगा कोई भी उससे छेड़छाड़ ,देखें हमारी यह खास रिपोर्ट ,देखें Live – Share Video

पहले पुलिस और एफएसएल के कुछ लोग अगर चाहे तो उनसे सम्पर्क करके मेनोपेल्ट करके कुछ कोशिश कर सकते थे फोरेंसिक सैम्पलों के (सबूतों) के साथ छेड़छाड़ की एफएसएल विभाग की अच्छी पहल !

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अब से क्राइम सिन से इकट्ठा किए गए फोरेंसिक सैम्पलों (सबूतों) के साथ कोई छेड़छाड़ नही हो पाएगी क्यूंकि मधुबन एफएसएल यूनिट ने एक अच्छी पहल की है, विभाग के महानिर्देशक द्वारा एक नही पहल इस्तेमाल में की गई है जाँच के लिए आने वाले सबूत एफएसएल के पास अबसे बार कॉड लगकर आयेगे जिसकी एफ आईआर जानकारी किसी को पता नही लग पाएगी जिससे सबूत की पहचान और वह कहा से आया है किस मामले में आया है इसकी गोपनीयता बनी रहेगी !

पहले इन फोरेंसिक सैम्पलों (सबूतों) के साथ पलिस व् फोरेस्न्सिक एक्सपर्ट द्वारा मेनोप्लेट करके छेड़छाड़ की जाती थी जिसको रोकने को लेकर मधुबन एफएसएल यूनिट द्वारा यह पहल शरू की गई है ताकि फोरेंसिक सैम्पलों (सबूतों) के साथ कोई छेड़छाड़ ना की जा सके !

हरियाण में अभी फ़िलहाल तीन एफएसएल लेब है जिसमे मुख्य लैब मधुबन पुलिस अकेडमी में है और वही भोड़सी और सुनेरिया में रीजनल लैब है जिसका काम अभी जारी है वही मामलो की अगर बात करे एफएसएल विभाग के पास महीने में 1400 के करीब अलग अलग मामलो आते है !

जानकारी देते हुए एडीजीपी व् विभाग के डायरेक्टर का कहना है की बार कोडिंग के माध्यम से सब कुछ गोपिनीय रहेगा जिसकी जानकारी किसी को भी नही रहेगी आम तोर से फोरेंसिक सेम्पलो सबूतों के साथ छेड़छाड़ हो जाती थी लेकिन बार कोडिंग के माध्यम से क्राइम सीन मोजुदा जगह पर घटी घटना से ही पुलिस सैंपल {सबूत} इक्कठा करने के बाद उसपर बार कॉड लगाएगी जिसके बाद वह एफएसएल लेबोरेट्री के पास जाने के बाद जमा होगा सेम्पल पर लगे हुए कोड को सकेंन करके उसकी फोरेंसिंक एक्पर्ट जांच करेगे लेकिन किसी को भी उस सेम्पल सबूत की पहचान नही पता होगी क्यूंकि एक लॉग इन आईडी और पास्वोर्ड के माध्यम से सेम्पल [सबूत] के पहचान गुप्त रहेगी !


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