हरियाणा में भाजपा ने 33 मौजूदा विधायकों को चुनाव में उतारा था, 19 हारे; कांग्रेस के 14 में से 8 जीते

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  • हरियाणा में भाजपा ने 33 मौजूदा विधायकों को चुनाव में उतारा था, 19 हारे; कांग्रेस के 14 में से 8 जीते
  • भाजपा के 16 विधायक ही दोबारा दोहरा पाए जीत ,वही तकरीबन सभी मंत्री हारे

( रिपोर्ट – कमल मिड्ढा ): हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 के नतीजे घोषित हो गए हैं , 75 पार का नारा देने वाली भाजपा 40 सीटों पर आकर सिमट गई है ! भाजपा ने 40 सीटों पर तो कांग्रेस ने 31 सीट जीती हैं ! 2014 के विधायकों की बात करें तो भाजपा ने 33 मौजूदा विधायकों को इस बार टिकट दिया था ,वही इन विधायकों में से महज 16 विधायक जीत पाए जबकि 19 विधायक हार गए हैं !

इनमें मनोहर लाल खट्टर के 10 मंत्रियों में से हरियाणा भाजपा के 7 बड़े चेहरे व मंत्री हार गए , वहीं कांग्रेस की बात करें तो कांग्रेस ने 14 मौजूदा विधायकों को टिकट दिया था, इनमें से 8 ने जीत दर्ज की जबकि 6 हार गए !

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दोबारा चुनाव लड़ने वाले 50 प्रतिशत से ज्यादा विधायक हर बार चुनाव हार जाते हैं ! यह सिलसिला 1977 से चला आ रहा है ! जबकि 1972 के चुनाव में भी 41 प्रतिशत मौजूदा विधायक चुनाव हार गए थे ! बात 1977 की करें तो इस चुनाव में 1972 विधानसभा चुनाव में जीते 26 विधायकों को टिकट दी गई थी !

इनमें से महज 2 विधायक जीत दर्ज कर पाए थे जबकि 24 विधायक हार गए थे ! इंदिरा विरोधी लहर और जनता पार्टी के चुनाव निशान पर अभी तक के इतिहास में सबसे ज्यादा 92.3 प्रतिशत विधायकों को हार का मुंह देखना पड़ा था !

2009 में 42 मौजूदा विधायकों ने चुनाव लड़ा ! इस चुनाव में 24 विधायकों को शिकस्त हासिल हुई जबकि 18 जीते ! आंकड़ा फिर 57 फीसदी से ज्यादा रहा ! वर्ष 2014 में मोदी लहर का असर था , इस चुनाव में 64 उम्मीदवार ऐसे थे जो 2009 में विधायक चुने गए थे ! इनमें से 43 उम्मीदवार चुनाव हार गए ! यानि 67.2 प्रतिशत उम्मीदवार चुनाव हारे, महज 21 उम्मीदवार चुनाव जीत सके !

भजनलाल कभी नहीं हारे आदमपुर से
भजनलाल ऐसे विधायकों में से एक हैं जो कभी आदमपुर से नहीं हारे ! उन्होंने 1968 में इस सीट से चुनाव लड़ना शुरू किया ! इसके बाद 1972, 1977, 1982, 1991, 1996, 2000, 2005 और 2008 के बाइ इलेक्शन में इस सीट से जीत दर्ज की ! 1987 में भी उनकी पत्नी जस्मा देवी ने इस सीट पर चुनाव लड़ा था, उन्होंने भी जीत दर्ज की थी ! उनके बाद इस सीट पर तीसरी बार कुलदीप बिश्नोई चुनकर आए हैं, वहीं एक बार रेणुका बिश्नोई भी विधायक बन चुकी हैं !

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