फास्टैग ट्रेनिंग के लिए अब गांव में भी ट्रेनिंग प्रोग्राम

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करनाल। फास्टैग ट्रेनिंग के लिए अब गांव में भी ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू हो गए हैं। लोगों को हाइजेनिक फ़ूड प्रोवाइड कराने के लिए जिले को पांच हिस्सों में बांटकर इंचार्ज नियुक्त किए गए हैं। व्यापारियों को असुविधा न हो इसके लिए इंचार्ज के मोबाइल नंबर भी जारी किए गए हैं। इन नम्बरों पर संपर्क कर व्यापारी अपने क्षेत्र में ही रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।

असंध के लिए कुलदीप +919050202022, इंद्री के लिए दलबीर +919518105154, घरौंडा के लिए एस कौशिक 9355357000, नीलोखेड़ी के लिए महावीर सिंह 8572807158, करनाल के लिए जीएस विर्क +919354491100 की नियुक्ति की गई है। किसी भी तरह के सुझाव या सहायता के लिए नितिन शर्मा 7015779417 की नियुक्ति की गई है।

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करनाल जिला ट्रेनिंग प्रोग्राम इंचार्ज नितिन शर्मा ने बताया कि खाने-पीने का सामान बनाने और बेचने के लिए जिलेभर में ट्रेनिंग प्रोग्राम जारी हैं। भारी संख्या में व्यापारी ट्रेनिंग के लिए रजिस्ट्रेशन कराकर ट्रेनिंग ले रहे हैं। सरकार की इस योजना के प्रति व्यापारियों में भारी उत्साह है। रविवार को असंध के गांव सालवन, नीलोखेड़ी के निसिंग और घरौंडा में रजिस्ट्रेशन और ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन किया गया।

ट्रेनर वरुण कोहरा व आँचल ने बताया कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) ने खाद्य सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए खाद्य पदार्थों से जुड़े कारोबारियों के लिए नियमों पर सख्ती करते हुए फूड सेफ्टी ट्रेनिंग एंड सर्टिफिकेशन यानी एफओएसटीएसी (फॉस्टैक) को लागू कर दिया है।

व्यापारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अब प्रदेश के हर फूड बिजनेस ऑपरेटर (एफबीओ) अर्थात खाद्य पदार्थों से जुड़े कारोबारी को इस योजना के तहत ट्रेंड और सर्टिफाइड होना अनिवार्य हो गया है। कारोबारियों को इस योजना के तहत ट्रेनिंग प्रदान कर सर्टिफिकेट प्रदान किया जाता है। खाद्य पदार्थ के कारोबार से जुड़े हर छोटे-बड़े कारोबारी के लिए ट्रेनिंग लेकर सर्टिफिकेट प्राप्त करना अनिवार्य है।
प्रशिक्षक जिला में खुद खाद्य कारोबारियों और कर्मचारियों से संपर्क कर उन्हें प्रशिक्षण दे रहे हैं।

हर प्रशिक्षु कारोबारी को गोल्डन रूल्स ऑफ एफएसएसएआई, हेड मास्क, एप्रेन और माऊथ मास्क भी प्रशिक्षण के दौरान दिया जाता है।

नंबर-1 की दिशा में करनाल
नितिन शर्मा ने बताया कि शुद्ध खाद्य पदार्थ बेचने की दिशा में करनाल जिले को नंबर-1 बनाने की दिशा में पूरी टीम काम कर रही है। उन्होंने बताया कि शासन ने खाद्य एवं पेय पदार्थ निर्माता और विक्रय करने वालों के लिए अब खाद्य सुरक्षा का प्रशिक्षण अनिवार्य कर दिया है। प्रत्येक खाद्य पदार्थ निर्माता व विक्रेताओं द्वारा यदि प्रशिक्षण नहीं लिया गया है तो आने वाले दिनों में संबंधित के खिलाफ अग्रिम कार्रवाई के साथ-साथ लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।

एफएसएसएआई (फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया) के निर्देश पर खाद्य एवं पेय पदार्थ निर्माताओं और विक्रेताओं को खाद्य सुरक्षा का प्रशिक्षण अनिवार्य कर दिया है। एफएसएसएआई की फॉस्टिक योजना के तहत सभी लाइसेंसधारी खाद्य निर्माताओं/विक्रेताओं या बिना लाइसेंसधारी खाद्य निर्माताओं/विक्रेताओं के लिए अनिवार्य प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किए जा रहे हैं।

प्रशिक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम के तहत साफ सफाई, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, पोषक तत्व, रख-रखाव, हैंडलिंग, निर्माण के दौरान सुरक्षा के तरीके आदि पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिससे गुणवत्तायुक्त और मानक स्तर के खाद्य पदार्थ तैयार हो सकें।

विशेषज्ञ दे रहे प्रशिक्षण
प्रशिक्षण में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के अनुसार खाद्य एवं पेय पदार्थों बनाने की प्रक्रिया/विक्रय और उसकी बेहतर गुणवत्ता एवं आधुनिक तकनीक का प्रयोग करते हुए मानक स्तर के खाद्य एवं पेय पदार्थ का उत्पादन किया जा सके, विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

लोगों से सुझाव, शिकायत लेकर जिज्ञासा का भी समाधान किया जा रहा है। एफएसएसएआई के निर्देश पर हर लाइसेंसधारी खाद्य एवं पेय पदार्थ निर्माता और बिना लाइसेंसधारी खाद्य निर्माताओं/विक्रेताओं एवं सभी खाद्य पदार्थ विक्रेताओं को यह प्रशिक्षण लेना जरूरी होगा।

लाइसेंसधारी होटल, रेस्टोरेंट एवं बार संचालक भी प्रशिक्षण में शामिल होंगे। प्रशिक्षण के बाद प्रमाण-पत्र जारी किया जाएगा। ऐसा नहीं करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वर्ष 2011 से लागू इस नियम पर सख्ती से अमल करने के आदेश एफएसएसएआई ने दिए हैं। ऐसे में आनेवाले दिनों में खाद्य पदार्थ विक्रेताओं ने प्रशिक्षण प्रमाणपत्र नहीं दिखाया तो अन्न व औषधि विभाग की ओर से इन पर कार्रवाई होगी।

इससे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता के साथ सुरक्षिता भी रहेगी। इस सर्टिफिकेट से प्रमाणित होगा कि वहां काम करने वाला स्टाफ हाईजीन और फूड सेफ्टी के लिए ट्रेंड है या नहीं।





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