सरकार की योजनाओं से बेटियों की राह हुई आसान, बेटी इशिता का परिवार अन्य बेटियों के लिए बना प्रेरणा

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करनाल 7 जून, आज के आधुनिक युग में बेटी बोझ नहीं बल्कि समाज की धरोहर समझी जाती हैं। एक समय ऐसा भी था, जब समाज के लोग बेटियों को बहुत बड़ा बोझ समझते थे। बेटी के सम्मान के लिए बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की शुरूआत की, परिणामस्वरूप बेटी आज बेटे से किसी भी सूरत में कम नहीं है, स्वयं बेटियों ने अपनी मेहनत से ऐसा करके दिखाया है तथा सरकार की योजनाओं ने भी बेटी के परिवार को कईं सौगात देकर उनकी राह आसान की है।

समाज में बेटियों की कमी पडऩे लगी। समाज का हर वर्ग चिंतित होने लगा। सरकार भी समझ गई कि केवल मात्र कानून का सहारा लेकर बेटियों को नहीं बचाया जा सकता। बेटियों को बचाने के लिए तो जन जागरण अभियान चलाना पड़ेगा और इस प्रेरक अभियान की शुरूआत देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 22 जनवरी 2015 को पानीपत से कर डाली।

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प्रचार माध्यमों ने भी लोगों को समझाने में पूरा जोर लगाया और कुछ लोग बेटियों को बचाने के अभियान में उदाहरण बनकर सामने आए। बेटी परिवार पर बोझ न हो इसके लिए सरकार ने भी कईं कल्याणकारी योजनाएं लागू की हैं जिनमें सुकन्या समृद्धि योजना, आपकी बेटी-हमारी बेटी योजना, बेटी की शादी पर विवाह शगुन योजना शुरू की जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान को चरितार्थ करते हुए बेटी परिवार पर बोझ न बने इसके लिए जन्म पर ही बैंक में पूंजी जोडऩे का काम करके सैक्टर 7 निवासी बलराम शर्मा ने अपनी पत्नी श्वेता से पे्ररित होकर एक नया उदाहरण प्रस्तुत किया।

जब इस बारे में सैक्टर 7 निवासी बलराम शर्मा व श्वेता से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि समाज के कुछ लोग बेटा-बेटी में अंतर समझते हैं परंतु हम समाज के ऐसे लोगों के खिलाफ हैं। हमारे घर 3 साल पहले 22 मार्च को एक बेटी ने जन्म लिया। बेटी के जन्म पर परिवार व रिश्तेदारों ने लडक़े से भी ज्यादा खुशी मनाई और बेटा-बेटी के अंतर को कभी महसूस नहीं किया।

बेटी इशिता अब स्कूल जाने लगी है और जब इसकी पढ़ाई व लालन-पालन सही प्रकार से होगा तो माना जाता है कि बेटी भी बेटे से कम नहीं है। इतिहास में ऐसे कईं उदाहरण लड़कियों ने दिए हैं। उन्होंने बताया कि अपनी लडक़ी के उज्ज्वल भविष्य के लिए उन्होंने भारत सरकार की सुकन्या समृद्धि योजना में डाकघर में खाता खुलवाया और जो भी सगे सम्बंधी व रिश्तेदार बेटी इशिता को आर्शीवाद के रूप में पैसे देकर जाते हैं, उन पैसों को घर में खर्च न करके मैंने बैंक में बेटी के नाम खाता खोला ताकि भविष्य में यह राशि उनकी उन्नति के लिए लगाया जाए।

इस विषय पर बेटी के पिता बलराम शर्मा का कहना है यदि अन्य परिवार भी बेटी के जन्म पर ऐसा कुछ करें तो समाज में बेटी बोझ नहीं परिवार का सम्मान होगी। संलग्र फोटो: इशिता परिवार

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