CM मनोहर लाल हॉउस का सीटू के बैनर नीचे मजदूर नेताओं व कर्मचारियों ने किया घेराव

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Live – देखें – CM मनोहर लाल हॉउस का सीटू के बैनर नीचे मजदूर नेताओं व कर्मचारियों ने किया घेराव , पुलिस बैरिकेट्स उठाकर भी फैंके महिला प्रदर्शनकारियों ने ,देखें Live – Share Video

संसद में पारित लेबर कोड्स मजदूरों के लिए गुलामी का दस्तावेज है। तीन कृषि कानून खेती और किसानों को उजाडऩे काम करेंगे। इसलिए इन्हे रद्द किया जाना चाहिए। उक्त बात सीटू प्रदेश अध्यक्ष सुरेखा व उपाध्यक्ष आंनद शर्मा ने करनाल में कही। करनाल की सब्जी मंडी में आयोजित सीटू के बैनर तले मुख्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर की विशाल घेराबंदी जनसभा को संबोधित कर रहे थे। मजदूर नेताओ ने कहा कि भाजपा सरकार ने इस कोरोना महामारी में देश की आत्मनिर्भरता को दांव पर लगाया है। मजदूरों, किसानों व मेहनतकश आवाम ने आजादी के बाद जो भी कुछ बेहतर हासिल किया है उसे छीनने का काम किया है। केंद्रीय बजट में देश में एक समान न्यूनतम वेतन ओर कुछ नहीं बल्कि मौजूदा मजदूरी को भी कम करना है। आखिर क्यों नहीं सरकार मजदूरों, ठेका व कच्चे कर्मचारियों के लिए 24000 न्यूनतम वेतन घोषित कर रही? लेबर कोड्स पारित करके सरकार ने ठेका कर्मचारियों के कानूनों को ख़तम किया है, फिक्स टर्म के नाम पर स्थाई रोजगार, लेबर कोर्ट को ख़तम करके न्याय पाने के बुनियादी अधिकार को छीनने का काम भाजपा सरकार ने किया है। इन कानूनों के बदलने के बाद मलिकान मजदूरों पर हमलावर है। उन्होंने कहा कि लाठी और गोली के आवाज पर किसान व मजदूर आंदोलन को दबाया जा रहा है। बड़े शर्म की बात है कि देश व प्रदेश की भाजपा सरकार चंद पूंजीपतियो के लिए देश की 90 प्रतिशत आबादी को गिरवी रख रही है। जिस सार्वजनिक क्षेत्र ने देश की बुनियाद को मजबूत किया है, आज उसे कोडिय़ो के भाव नीलम कर देश की आत्मनिर्भरता को दांव पर लगाया का रहा है। आंगनबाड़ी वर्कर्स एंड हेल्पर से यूनियन की राज्य सचिव रूपा राणा आशा वर्कर्स यूनियन हरियाणा करनाल के जिला प्रधान सुदेश वर्कर यूनियन की राज्य महासचिव पूजा राठी मिड डे मील वर्कर्स यूनियन की जिला की नेता शिमला ग्रामीण सफाई कर्मचारी यूनियन के सोनीपत जिला के नेता राजेश ने कहा कि हम मांग कर रहे हैं कि न्यूनतम वेतन 24000 हो, स्कीम वर्कर्स व कच्चे कर्मियों को पक्का किया जाए, मनरेगा में काम मिले, 200 दिन काम 700 रूपए मजदूरी हो, भ_े पर पथेर का रेट 725 रूपए हो, वन विभाग में मस्ट्रोल लागू हो, स्वास्थ्य कर्मी की छटनी न हो, स्ट्रीट वेंडर एक्ट 2014 लागू हो, सरकारी व सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण पर रोक लगे, प्रत्येक जरूरतमंद परिवारों को 10 किलो अनाज प्रतिव्यक्ति व 7500 रूपए मिले। विभागीय यूनियनों कि मांगो का समाधान हो। सर्व कर्मचारी संघ के राज्य नेता कृष्ण शर्मा, सीआईटीयू राज्य उपप्रधान आनंद शर्मा, राज्य सचिव सुनील दत्त, राज्य सचिव सुनीता, सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान मलकीत सिंह, सीटू करनाल जिला प्रधान सतपाल सैनी, जगपाल राणा, सुशील गुर्जर, ओपी माटा, सियानंद, जगमाल सिंह, रूपा राणा, सुदेश, बिजनेश, रोशनी, सुमन सुभरी, शिमला, सुनीता, जोगिंद्र सिंह, जोगा सिंह व भाग सिंह ने भी प्रदर्शन को सबोधित किया। प्रदर्शन करते हुए मांग पत्र मुख्यमंत्री के नाम दिया गया। ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप मांग पत्र लिया। दूसरी ओर सर्व कर्मचारी संघ ने भी मांगों का ज्ञापन डीसी को सौंपा। इस अवसर पर

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ये हैं मुख्य मांगें

1. मजदूर विरोधी चारों लेबर कोड्स (कानून) रद्द करो।

2. खेती व खाद्य सुरक्षा को उजाडऩे वाले तीनों कृषि कानून वापस लो।

3. बिजली (संशोधन) बिल 2020 वापस लो।

4. न्यूनतम वेतन 24000 रूपए लागू करो।

5. सभी निर्माण मजदूरों का श्रमिक कल्याण बोर्ड में रजिस्ट्रेशन हो, श्रमिकों को सभी लाभ व सुविधाएं मिलें, 90 दिन की शर्त खत्म करो।

6. आंगनवाड़ी, आशा, मिड डे मील, क्रेच कर्मियों, ग्रामीण सफाईकर्मियों, ग्रामीण चैकिदारों, वन मजदूरों, स्वास्थ्य, आरोही सहित तमाम ठेकाकर्मियों को पक्का करो।

7. विभागीय यूनियनों के आन्दोलन की मांगो का तुंरत समाधान किया जाए।

8. मनरेगा में 200 दिन काम 700 रूपये दिहाड़ी हो।

9.भ_ा मजदूरों के लिए पथेर का रेट 725 तय हो।

10. रेहड़ी-पटरी मजदूरों/ दुकानदारों के लिए पथ विक्रेता कानून 2014 लागू करो।

11. सेल्स प्रमोशन एम्पलाईज एक्ट 1976 बचे, अनुपालना हो वह दवा प्रतिनिधियों के काम के घंटे 8 सुनिश्चित हों।

12. सभी जरूरतमंद परिवारों को प्रतिव्यक्ति 10 किलो अनाज फ्री मिले। गैर करदाता परिवारों को 7500 रूपये महीना नगद दो।

13. बैंक-बीमा, रेलवे समेत सार्वजनिक क्षेत्र व सरकारी विभागों का निजीकरण बंद हो।

14. स्थाई भर्ती हो व तमाम ठेका/कच्चे कर्मचारियों को पक्का करो।

15. सभी के लिए फ्री स्वास्थ्य सुविधा एवं सामाजिक सुरक्षा प्रदान करो।

16. असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा कानून लागू हो।





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