श्री घण्टाकर्ण महावीर देवस्थान पर मासिक श्रद्धालु संगम का सुंदर आयोजन

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करनाल। भक्तजनों की आस्था का केंद्र बनकर उभर रहे तीर्थस्थल श्री घण्टाकर्ण महावीर देवस्थान पर कृपा दिवस चौदस के उपलक्ष्य में श्रद्धा-भक्ति तथा दैवी आशीर्वाद का अनूठा ही दृश्य दिखलाई दिया। अल सुबह से देर सांझ तक दैवी कृपा की आशा से उपस्थित श्रद्धालुओं का मेला लगा रहा। अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु दूर-दूर से आए भक्तों तथा स्थानीय श्रद्धालुओं में विशेष कृपा प्रसाद पाने के लिए दर्शनीय उत्साह और लग्न देखते ही बनती थी। जैन वर्ग के अलावा अन्य वर्गों से जुड़े धर्मपे्रमियों का भी इस धर्मस्थल के प्रति जुड़ाव इसकी सार्वजनिक स्वीकृति और मान्यता की झलक दिखा रहे थे।
श्री घण्टाकर्ण बीजमन्त्र के सामूहिक जाप के द्वारा देवता का आह्वान करते हुए सभी के कुशल-क्षेम की कामना की गई। साध्वी जागृति, अजय गोयल, अलका जैन, निशा जैन, अनिता जैन, प्रवीण जैन, मनीषा जैन ने अपने भजनों से श्री घण्टाकर्ण दादा का गुणगान करते हुए समां बांध दिया। मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है, रक्ख दो सिर पर हाथ, मेहरां वालिया दादा रक्खी चरणां दे कोल, है यह पावन भूमि यहां बार-बार आना, आ गए घण्टाकर्ण जी तेरे नाम दे पुजारी आदि भजनों ने भक्तों को भक्ति-गंगा में भावपूर्वक डुबकियां लगवाई।
महासाध्वी श्री प्रमिला जी ने कहा कि श्री घण्टाकर्ण एक ऐसे विलक्षण देवता हैं जिन्हें हिन्दू, जैन तथा बौद्ध तीनों परम्पराओं में संकटमोचक तथा मनोकामनापूरक होने का सम्मानित स्थान प्राप्त है। श्री घण्टाकर्ण पूर्व जन्म में तुंगभद्र नामक क्षत्रिय राजा थे जो तीर्थयात्रियों, धार्मिक बंधुओं, स्त्रियों की आततायियों से रक्षा किया करते थे। उनके कान घण्टे जैसे थे और उन्हें घण्टे की ध्वनि प्रिय थी जिस कारण उनका घण्टाकर्ण नाम विख्यात हुआ। वे तीर-कमान तथा तलवार धारण करते थे जिस कारण उनकी प्रतिमा भी इन आयुधों को धारण किए हुए उपलब्ध होती है। तुंगभद्र लूट तथा आतंक का निशाना बने लोगों की प्राण रक्षा के निमित्त लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए और श्री घण्टाकर्ण महावीर नाम से भक्तवत्सल दिव्य चमत्कारी यक्ष जाति के देवता बने। यह देव रोग-शोक, भय, संकट, प्रेत-बांधा, अग्नि-भय, राजकीय कष्ट से छुटकारा दिलाने वाले प्रभावशाली व्यक्तित्व हैं। हिंदू परम्परा में इन्हें बद्रीनाथ तीर्थ का क्षेत्रपाल देवता तथा शिवजी का अद्वितीय भक्त और गण माना जाता है। तन्त्रशास्त्र की धारणा है कि श्री घण्टाकर्ण जी के अनुकूल तथा प्रसन्न हुए बिना कोई भी साधना तथा अनुष्ठान सफल नहीं होता। यह ऐसे शक्तिसम्पन्न देव हैं जिनके प्रसन्न हो जाने पर ब्रह्माण्ड की कोई भी शक्ति बाल बांका नहीं कर सकती और जिनका कोप हो जाने पर ब्रह्मा भी बचाव नहीं कर सकता।
आरती तथा प्रीतिभोज की सेवा कस्टम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी दिल्ली निवासी धन कुमार जैन की ओर से रही। श्री घण्टाकर्ण देवता के जयकारों से दिन भर मंदिर परिसर गूंजता रहा।
जारीकर्ता : डॉ. मोहन लाल गर्ग
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