निर्मलधाम में कारवाने अदब की महफिल सजी

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जिसमें करनाल तथा आसपास से पधारे कवियों, शायरों तथा सहित्यकारों ने शिरकत की। महफिल के अगाज से पहले सभी ने राष्ट्रगान गा कर देश के लिए आपसी भाईचारा कायम होने तथा सुख-समृद्धि की कामना की तथा सभी ने एकदुसरे को होली की मुबारकबाद दी।  महफिल की विशेषता यह रही कि करनाल के वरिष्ठ साहित्यकार तथा कारवाने अदब के संरक्षक महावीर प्रसाद शास्त्री को माल्यार्पण कर सम्मानित भी किया गया, उनको उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से राज्यपाल रामनायक तथा मुख्य मंत्री योगी अदित्यनाथ द्वारा कालीदास सम्मान से नवाजा गया जिसके तहत उन्हें 51000 रुपये की राशि तथा प्रशस्ति पत्र देकर लखनऊ में सम्मानित किया गया। गौरतलब है कि आचार्य महावीर प्रसाद शास्त्री को हरियाणा सरकार की हरियाणा साहित्या अकादमी द्वारा हरियाणा गौरव पुरस्कार देने की घोषणा भी की गई है। जिसके तहत उन्हें 2 लाख रुपये की राशि तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जायेगा। उनकी दोनों उपलब्धियों के लिए कारवाने अदब ने उनका मान-सम्मान किया। आज की महफिल की अध्यक्षता रेडियोमंत्रा के स्थानीय प्रबंधक इमरान खान तथा गिरधारी लाल शर्मा ने संयुक्त रूप से की, जबकि मंच संचालन भारत भुषण वर्मा ने किया।
महफिल में डॉ. एस.के. शर्मा ने कहा कि शमां की तरह जो रात कटी, मुझे सुली पर चैन से यादें कदे यार ने सोने ना दिया। अंजु शर्मा ने कहा साहिल पे खड़े हो तुम्हें क्या गम चले जाना मैं डूब रहा हूं अभी डूबा तो नहीं हुं, सुमन मुस्कान ने कहा जिसमें रंग दिवाली के हों, और खुश्बु रमजान की, मोदी जी फिर छवी बना दो ऐसी हिन्दुस्तान की, सुरेन्द्र मरवाहा ने कहा जीत लेते हैं हम मुहब्बत से गैरों का भी दिल पर ये हुनर जाने क्यों अपनों पर चलता ही नहीं, भारत भुषण वर्मा ने कहा भारत माँ के वीर सपूतों तुम हो राम हरि घनश्याम।
इमरान खान ने कहा जिस शख्स को माँ की दुआओं का सहारा मिल रहा है उसे बीच भंवर में भी किनारा मिल रहा है, एच.डी. मदान ने कहा मांए नी मांए मैं इक शिकरा यार बनाया, हर्ष जैन ने कहा कविता, कवि की जात है, कविता कवि का धर्म, हरबंस पथिक ने कहा आईने में एक दिन देखा जो खुद को गौर से मुझ को हर इन्सान अपने आप से बेहतर लगा, लक्ष्मी नारायण चौरसिया ने कहा जख्म दिए हैं अपनों ने याद बेगाने आते हैं, डॉ. रुद्रमणी शर्मा ने कहा समझा नहीं रुद्र माया को तेरी, तेरे जगत को ये क्या हो गया। अनिल चौपड़ा ने कहा अगर तैरना है तो समुन्दर में तैरो, नदी-नालों में क्या रखा है। गिरधारी लाल शर्मा ने कहा जिन्दगी का चलन है तेरे वास्ते, रमेश सचदेवा ने कहा मैने भी देखने की हद कर दी, वो भी तस्वीर से निकल आया, गुरमुख सिंह वडैच ने कहा कौन किस के साथ तय करता है जख्मों का सफर, अशोक वश्ष्टि ने कहा देख ले जो प्यार की नजरों से तूं, आसुंओं को हस के जो पी जायेगा। हरमीत कौर वडैच ने कहा दुनियां ते जन्म ल्ये, पीरां तें फकीरा नें।
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