निर्मलधाम की महफिल में कवियों, शायरों तथा सहित्यकारों ने की शिरकत

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 निर्मलधाम में कारवाने अदब की महफिल सजी जिसमें करनाल तथा आसपास से पधारे कवियों, शायरों तथा सहित्यकारों ने शिरकत की। महफिल के अगाज से पहले सभी ने राष्ट्रगान गा कर देश के लिए आपसी भाईचारा कायम होने तथा सुख-समृद्धि की कामना की तथा सभी ने एकदुसरे को नववर्ष की मुबारकबाद दी।  महफिल की विशेषता यह रही कि करनाल के कवि मित्र सुफी गायक गुरमुख सिंह वडैच को हरियाणा पंजाबी साहित्य एकादमी पंचकुला द्वारा उनकी गजलों की सीडी बुलेशाह के संग साथ गाये गए उनके सुफी कलाम के उपलक्ष में वर्ष 2015 का लोक गायक अवार्ड के लिए चयन किया गया जिसमें उन्हें 51 हजार की राशि पुरस्कार में दी जायेगी। कारवाने अदब करनाल जो शायरों की एक अदबी संस्था है उसके लिए फक्र की बात है क्यों कि यह सीडी कारवाने अदब ने प्रस्तुत की और कवित्री अंजु शर्मा इसकी प्रोडयुसर रही। आज की महफिल की अध्यक्षता अशोक विशिष्ट ने की, जबकि मुख्य अतिथि गुरमुख सिंह वडैच रहे। मंच संचालन भारत भुषण वर्मा ने किया।
महफिल में डॉ. एस.के. शर्मा ने कहा कि मेरे देश के राज्यों में एक राज्य हरियाणा ऐसा जिन बलात्कारियों और यौन शोषण करने वाला का बोलबाला, अंजु शर्मा ने कहा जिंदगी तो है बस सांसों का एक सिलसिला, भारत भुषण वर्मा ने कहा थर-थर कांपे वैरी सारे, ऐसा रण करो घमासान सन पैंसठ एकहत्तर वाले युद्ध कारगिल विजय समान, सुरेन्द्र मरवाहा ने कहा हम तो लिख देते हैं जो भी दिल में आता है हमारे, आप के दिल को छू जाए तो इतफाक समझिए, अशोक वशिष्ट ने कहा जम कर बात मुझे करने दे, कल प्रिय अपनी बात ना होगी। गुरमुख सिंह वडैच ने कहा ख्वाब सब पुरे हमारे जिन्दगी के हो गए, तुम किसी के हो न हों, हम तो तुम्हारे हो गए। ओम प्रकाश उल्फत ने कहा था कब से मैं तन्हाई की तारीकियों में गुम, मुद्दत के बाद आस का जुगनु मिला तो है।
समयनिता चौधरी ने कहा बेबस नादान पर हैवानियत ना हो अब कभी, राजेन्द्र शर्मा ने कहा लागी धुन कैसी मन बोले कृष्ण संग राधे-राधे, घनश्याम शर्मा ने कहा नीची-नीची सी निगाह कर के मुस्काराओं ना तुम इस कदर, अनिल चौपड़ा ने कहा ना करना जिन्दगी पर इतना अभिमान। डॉ. रूद्रमाणी शर्मा ने कहा गरके दुनियां है रूद्र भूल के भी हम तो यादें खुदा नही करतें, गिरधारी लाल शर्मा ने कहा  खूबसूरत हैं तेरी आंखे ये बताऊं कैसे, एस.आर. पाहवा ने कहा दोष क्या मेरा था माली तुने क्यों तोड़ा मुझे, हरबंस पथिक ने कहा पहले अपना तो गिरेंबा देख ले, आईना मुझ को दिखाना बाद में, मुनी राज शर्मा ने कहा दिखता हुं आज मैं धुधला सितारा पर ना भूलों कल अंधेरी रात में नवज्योतसना बन कर आऊंगा।




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