हमें क्लाइमेट जोन के हिसाब से पशुाओं की नस्ल की पहचान करनी होगी, ताकि पशु पर वातावरण का नकारात्मक प्रभाव न पड़े- डा. केसमा रेड्डी

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राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान में निकरा प्रोजेक्ट के तहत वातावरण के कुप्रभावों एवं उससे बचाव संबंधी विषय पर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इसमें देश के 9 शोध संस्थानों के वैज्ञानिकों ने भाग लिया और इन केंद्रों पर किए जाने वाले शोध कार्यो की समीक्षा की गई। एनडीआरआई के निदेशक आरआरबी सिंह ने डा. एस भास्कर (एडीजी) क्लाइमेट चैंग, आईसीएआर तथा डा. केसमा रेडी का स्वागत किया। डा. एस. भास्कर की अध्यक्षत में आयोजित इस समीक्षा बैठक में वैज्ञानिकों ने निकरा प्रोजेक्ट के तहत किए गए शोध कार्यो की रिपार्ट प्रस्तुत की। समीक्षा बैठक में मुख्य रूप से वातावरण के दुष्प्राभावों, उनके बचाव, पशुओं के खान पान, उनकी आवास व्यवस्था और इस क्षेत्र में विकसित हुई नई तकनीकों के बारे में विस्तार से चर्चा की गई।
क्रिडा संस्थान हैदराबाद के निदेशक डा. केसमा रेड्डी ने कहा कि हमें क्लाइमेट जोन के हिसाब से पशुाओं की नस्ल की पहचान करनी होगी, ताकि पशु पर वातावरण का नकारात्मक प्रभाव न पड़े।  वहीं डा. भास्कर ने कहा कि हमें वातवारण के प्रभाव से पशुओं के बचाते हुए हमारे पास जो भी चारा उपलब्घ है, उसी के आधार पर पशु की उत्पादकन क्षमता को बढ़ाना होगा।
पशु शरीर क्रिया विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डा. महेंद्र ङ्क्षसह ने कहा कि एनडीआरआई के वैज्ञानिक निकरा प्रोजेक्ट के तहत इस बात का पता लगा रहे है कि किस नस्ल पर अत्यधिक तापमान का नकारात्मक असर अधिक होता है, उससे कितने प्रतिशत दूध की गिरावट आती है और दूध की गुणवता पर कितना प्रभाव पड़ता है। जल्द ही इसके परिणाम आने वाले हैं। इस अवसर पर डा. आरसी उपाध्याय, डा. रामा कृष्ण, डा. आरएम लुदरी, डा. महेंद्र सिंह, डा. चक्रवर्ती, डा. आईडी गुप्ता, डा. अंजली अग्रवाल, डा. एके गुप्ता सहित अन्य वैज्ञानिकों ने अपने विचार रखें।

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