जिले के विधायकों व सांसद को पुरानी पेंशन नीति की बहाली के लिये दिया जाएगा मांगपत्र :- संदीप टूरण

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करनाल: पेंशन बहाली संघर्ष समिति जिला करनाल के जिला अध्यक्ष संदीप टूरण द्वारा प्रैस ब्यान जारी करके बताया की प्रदेश कार्यकारिणी ने आगामी अगस्त व सितंबर माह के कार्यक्रम की रूप रेखा तैयार की गई है जिसके तहत 1 अगस्त से हरियाणा प्रदेश के सभी 90 विधायकों व सांसदो को पुरानी पेंशन नीति बहाली व अपनी पार्टी का पुरानी पेंशन नीति की बहाली के लिए रूख स्पष्ट करने को कहा जाएगा इसके साथ ही सभी राजनीतिक पार्टियों के अध्यक्ष व पक्ष तथा विपक्ष के नेताओं को राज्य कार्यकारिणी द्वारा ज्ञापन दिया जाएगा।

इसके उपरांत सितम्बर माह में पुरानी पेंशन जागरूकता कार्यक्रम अभियान के तहत हरियाणा के सभी सरकारी विभागों में ब्लॉक, जिला व राज्य कार्यकारिणी के सदस्य एनपीएस के सभी अधिकारी व कर्मचारियों को जागरूक करेगें तथा पेंशन बहाली संघर्ष समिति के सहयोग के लिए समर्थन जुटा कर एक बड़े आंदोलन के लिए तैयार करेगें।

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राज्य संगठन सचिव संदीप शर्मा ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष विजेन्द्र धारीवाल के नेतृत्व में पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा सड़क से संसद तक गुंज रहा है पेंशन बहाली संघर्ष समिति के अथक प्रयास से पुरानी पेंशन नीति की बहाली का मुद्दा आज प्रदेश के कर्मचारियों का सबसे प्रमुख मुद्दा बन गया है। अब कोई भी राजनीतिक दल पुरानी पेंशन नीति की बहाली के मुद्दे को दरकिनार के सरकार नही बना सकेगा।

देश व प्रदेश में सेवानिवृत्त हो रहे एनपीएस कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने पर उनकी पेंशन 500 से 2500 तक बन रही है जोकि हरियाणा में बुढ़ापा पेंशन से भी कम है साथ ही कर्मचारी के जीवन भर की जमापूंजी शेयर बाजार के हवाले है जिसकी वापसी की भी निश्चित गांरटी नही है।

जबकि कर्मचारी बार-बार सरकार से आग्रह भी कर चुके है किंतु कोई हल नही निकल पाया है जिस कारण कर्मचारियों के लिए संघर्ष ही एकमात्र रास्ता शेष है और कर्मचारी अपने भविष्य को बचाने के लिए पेंशन बहाली संघर्ष समिति के बैनर तले संगठित होकर प्रयास कर रहे है।

प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र धारीवाल ने बताया कि सरकार द्वारा पुरानी पेंशन नीति बहाल करने से ना केवल सरकारी कर्मचारी का बल्कि सरकार का भी फायदा है एक तो लाखों करोड़ एनपीएस में जमा पैसा सरकारी खजाने में वापिस आएगा दूसरा जितना पैसा कर्मचारी का एनपीएस के माध्यम से नीजि कम्पनियों में जा रहा है उतना ही हिस्सा सरकार भी कम्पनियों को दे रही है जिसका भार लगातार सरकार पर बढ़ता जा रहा है। इसलिए हम सरकार से मांग करते है के शीघ्र अति शीध्र पुरानी पेंशन नीति को बहाल करे।





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