प्रदेशभर के स्वास्थय कर्मियों ने क्रमिक अनशन कर किया रोष प्रदर्शन

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बहुउद्देशीय स्वास्थय कर्मचारी एसोसिएशन के बैनर तले अपने मांगों को लेकर आज प्रदेशभर के महिला एवं पुरुष कर्मचारियों ने जिला स्तर पर सिविल सर्जन कार्यालय के सामने क्रमिक अनशन शुरु करते हुए रोष प्रदर्शन किया। इस दौरान स्वास्थय कर्मियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

एसोसिएशन के सचिव हरिनिवास ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि फिर भी सरकार एमपीएचडब्ल्यू काडर की मांगों को गंभीरता से न लेते हुए अधिसूचना जारी नहीं करती है तो 27 अगस्त से प्रदेश के महिला एवं पुरुष स्वास्थय कर्मचारी स्वास्थय सेवाएं पूर्ण रुप से बंद कर देंगे। इस दौरान जनता को होने वाली असुविधा की जिम्मेदारी पूर्ण रुप से हरियाणा सरकार व स्वास्थय विभाग की होगी।

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स्वास्थय कर्मियों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि बहुउद्देशीय स्वास्थय कर्मचारी एसोसिएशन हरियाणा काफी लम्बे समय से अपनी मांगों को लागू करवाने को लेकर प्रयासरत्त है लेकिन इस बारे में काफी बार निजी तौर पर महानिदेशक स्वास्थय सेवाएं हरियाणा से भी मिल चुके हैं।

इसके अलावा एसोसिएशन द्वारा बीती 15 जुलाई को सीएम सिटी करनाल में रोष प्रदर्शन भी किया गया था, जिसके उपरांत 23 जुलाई को मुख्यमंत्री के ओएसडी भूपेश्वर दयाल द्वारा एसोसिएशन के साथ मीटिं करते हुए तीन दिन के अंदर दोबारा वित्त विभाग व हेल्थ कमिश्नर के साथ मीटिंग करवाते हुए मांगों की अधिसूचना करवाने का भरोसा दिलाया गया था लेकिन अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है, जिससे कर्मचारियों में रोष व्याप्त है। उन्होंने कहा कि उनकी पे ग्रेड सहित मांगों की फाईले महानिदेशक स्वास्थय सेवाएं हरियाणा, अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थय विभाग, प्रधान सचिव हरियाणा सरकार, स्वास्थय मंत्री व मुख्यमंत्री द्वारा अप्रूवल होने के बावजूद वित्त विभाग में ज्यों की त्यों पड़ी है।

इसके अलावा सरकार द्वारा एनएचएम में कार्यरत महिला एएनएम को प्रस्तावित रेगुलाईजेशन एक्ट 2018 में शामिल नहीं किया गया है जिससे प्रदेशभर के स्वास्थय कर्मियों में भारी रोष है।

स्वास्थय कर्मियों ने मांग की कि एम.पी.एच.डब्ल्यू पुरुष व महिला एम.पी.एच.एस पुरुष व महिला व एसएमआई के पदों को तकनीकी घोषित किया जाए।एम.पी.एच.डब्ल्यू पुरुष को एमपीएचडब्ल्यू महिला के समान वर्दी भत्ता दिया जाए। एमपीएचडब्ल्यू पुरुष व महिला एमपीएचएस पुरुष व महिला को एफटीए क्रमश: एक हजार व दो हजार रुपये दिया जाए।

आरसीएच परियोजना के अन्तर्गत कार्यरत एमपीएचडब्ल्यू महिला को दो वर्ष की सेवाकाल के उपरांत नियमित करने की पॉलिसी बनाई जाए। नियमित न होने तक समान काम समान वेतन लागू किया जाए। आरसीएच परियोजना के अन्तर्गत कार्यरत एमपीएचडब्ल्यू महिला को एफटीएम व वर्दी भत्ता दिया जाए। इस अवसर पर ओ.पी. सिंह, कृष्ण शर्मा सचिव एसकेएस, अशोक पांचाल ब्लाक सचिव, रोशन गुप्ता, साहब सिंह एवं ओपी माटा उपस्थित रहे।


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