करनाल की धरती से पाकिस्तान पहुँची गुरु नानक सद्भावना यात्रा को मिल रहा है भरपूर सम्मान व प्यार

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करनाल की धरती से पाकिस्तान पहुँची गुरु नानक सद्भावना यात्रा को यहाँ भरपूर सम्मान व प्यार मिल रहा है। 19 जुलाई को करनाल के ऐतहासिक गुरुद्वारा मँजी साहेब से रवाना हुई गुरु नानक सद्भावना यात्रा को 20 जुलाई को श्री अकाल तख़्त साहेब से अरदास के बाद श्री हरमंदिर साहेब के ग्रंथी सिंह साहेब सूखजिंदर सिंह ने इस मिशन में शामिल सभी साथियों को सिरोपा भेंट कर पाकिस्तान के लिए रवाना किया।

अटारी चेक पोस्ट पर जहाँ इमिग्रेशन व कस्टम के भारतीय स्टाफ़ ने दिल से सहयोग दिया व यात्रा को शुभकामनाओं के साथ रवाना किया वहीं पाकिस्तान साइड में भी वहाँ के इमिग्रेशन के अधिकारियों ने उसी जोश व अपनेपन से सभी का स्वागत किया। सामाजिक संस्था निफ़ा द्वारा शिरोमणि गतका फ़ेडरेशन आफ इंडिया, डेरा कार सेवा, गुरुद्वारा मँजी साहेब के सहयोग से निकाली गयी इस यात्रा में सिख, हिंदू व मुस्लिम धर्म से कुल 55 लोग शामिल हैं लेकिन पाकिस्तान बाबा सुखा सिंह के नेतृत्व में 9 लोग गये हैं।

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यात्रा के मुख्य संयोजक प्रीतपाल सिंह पन्नु ने पाकिस्तान से बताया कि पाकिस्तान की ओर गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पूरब को लेकर ख़ासा उत्साह है पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से इस ऐतिहासिक पल को यादगार बनाने के लिए गुरुद्वारों की इमारतों के कायाकल्प से लेकर, नए रिहायशी कमरों की उसारी, लंगर की व्यवस्था के लिए विशेस प्रबंध किए जा रहे हैं।

यात्रा के पहले पड़ाव में लाहौर क़िले में में गुरु अर्जुन देव जी के शहादत स्थल गुरुद्वारा डेरा साहेब में माथा टेकने व शेरे पंजाब महाराजा रणजीत सिंह की समाधि पर विज़िट के बाद यात्रा गुरु नानक देव जी के जनम स्थान गुरुद्वारा ननकाना साहेब पहुँची व आस पास के गुरुद्वारों जैसे मालजी साहेब, कियारा साहेब, पट्टी साहेब, बाल लीला साहेब आदि के दर्शन किए।

रात्रि के दीवान में प्रीतपाल सिंह पन्नु ने पाकिस्तान की सिख संगत को यात्रा के मक़सद की जानकारी देते हुए बताया कि यह यात्रा गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व को समर्पित है व इस यात्रा में सामाजिक बुराइयों के ख़िलाफ़ गुरु जी की क्रांतिकारी विचारधारा को नुक्कड़ नाटकों व लाइट एंड साउंड ड्रामा के माध्यम से लोगों तक पहुँचाया जाएगा वहीं चार चरणो की यात्रा के मार्ग में पड़ने वाले 100 शहरों में 550-550 पौधे लगाए जाएँगे व हर पौधे में गुरु नानक जनम भूमि ननकाना साहेब की मिट्टी व पानी डाली जाएगी ताकि लोग गुरु साहेब की जनम भूमि की मिट्टी से भावना जुड़ी होने के कारण हर पौधे की संभाल करें।

पाकिस्तान गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के नव नियुक्त सदस्य डॉक्टर मिमपाल सिंह, गुरुद्वारा ननकाना साहेब के हेड ग्रंथी प्रेम सिंह व ग्रंथी दया सिंह ने यात्रा का नेतृत्व कर रहे बाबा सुखा सिंह, संयोजक प्रीतपाल सिंह पन्नु व अन्य साथियों गुरप्रीत सिंह खालसा, अजीत सिंह चावला, तरनपाल सिंह, हरमिंदर सिंह, जितेंद्र नरवाल, रणजीत सिंह बिलोना व जगतार सिंह को इस सिरोपा देकर सम्मानित किया व इस नेक कार्य की सफलता के लिए गुरु चरणो में अरदास की।

यात्रा के पाकिस्तान में दूसरे दिन आज ननकाना साहेब से रवाना होने से पूर्व बाबा सुखा सिंह, प्रीतपाल सिंह पन्नु व अन्य साथियों ने गुरुद्वारा ननकाना साहेब में पौधे लगाकर पर्यावरण के प्रति गुरु नानक देव जी के प्यार को याद किया गया व यात्रा के दौरान 100 शहरों में 55000 से ज़्यादा पेड़ लगाने के अभियान की शुरुआत की गयी। इस अवसर पर गुरुद्वारा ननकाना साहेब में पाकिस्तान के अकाफ बोर्ड के अधिकारी अब्दुल रहमान ने भी एक पेड़ लगाया व निफ़ा ओर शिरोमणि गतका फ़ेडरेशन द्वारा करनाल की धरती से शुरू किए गये इस अभियान को एक अनूठा व प्रकृति के प्रति जागरूकता पैदा करने वाला अभियान बताया। पौधा रोपण के बाद टीम ने ननकाना साहेब की पवित्र मिट्टी व जल एकत्रित किया ताकि उसे यात्रा के दौरान लगने वाले 55000 पौधों में डाला जा सके।

आज यात्रा का पड़ाव गुरुद्वारा सच्चा सौदा के दर्शन के बाद हसन अब्दाल स्थित गुरुद्वारा पंजा साहेब रहेगा जहाँ से कल कर्तारपुर साहेब जाकर दर्शन किए जाएँगे व कोरिडोर के काम की प्रगति को भी देखा जाएगा।

पाकिस्तान के लोग चाहते हैं दोनो मुल्कों में अमन व भाईचारा।

अपने दो दिन के अब तक के पाकिस्तान प्रवास के दौरान हमने ये महसूस किया है की यहाँ का अवाम हिन्दोस्तान के साथ अच्छे सम्बंध चाहता है व दोनो देशों के रिश्तों में दरार को सियासत की उपज मानता है। आम तौर पर आतंकवाद के चलते दुश्मन देश के रूप में पहचान रखने वाले पाकिस्तान में एंट्री करते समय यात्रा की टीम के मन में अजीब तरह की बेचैनी थी व यहाँ होने वाले व्यवहार को लेकर शंकाएँ थी।

लेकिन यहाँ लोग जिस प्रकार से गर्म जोशी से मिल रहे हैं व विशेसत बाबा नानक के प्रति उनकी जो भावनाएँ हैं वह एक अलग ही तस्वीर दिखाती हैं। गुरुद्वारा ननकाना साहेब के साथ साथ अन्य गुरुद्वारों में सिखों के इलावा मुस्लिम बहुतायत में आते हैं ओर दिया मोमबत्ती आदि जलाकर महान गुरु के प्रति अपनी अकीदत पेश करते हैं। गुरुद्वारा ननकाना साहेब में रिहायशी कमरों का प्रबंध देख रहे अलतीफ ने बताया की ननकाना साहेब में क़रीब 250 सिख परिवार हैं लेकिन हर रोज भारी संख्या में मुस्लिम यहाँ गुरुद्वारा जनम अस्थान में ज़ियारत करने आते हैं।

हमारी गाड़ी के ड्राइवर बिलाल का मानना है कि लहनदे व चड़दे पंजाब का कल्चर, भाषा व खान पान एक जैसा है व दोनो देशों में टकराव के बावजूद आम आदमियों में एक दूसरे के प्रति जुड़ाव को बनाए रखता है।

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