क्या गुरबक्श सिंह खालसा की मौत के बाद जेलों में सजा पूरी कर चुके सिख कैदियों को मिलेगी आजादी।

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गुरबक्श सिंह खालसा खालसा की मौत के बाद से सिख समाज में काफी रोष है। गुरबक्श सिंह खालसा ने मंगलवार को अपने गाँव ठसका अली में पानी की टंकी से कूदकर आत्मा हत्या का प्रयास किया था। जिसके बाद उनको तुरंत इलाज़ के लिए कुरुक्षेत्र के सरकारी हॉस्पिटल लाया गया, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया। जिसके बाद से सिख संगत ने शाहाबाद ठोल मार्ग पर जाम लगा दिया। जिसके बाद पुलिस ने कुछ अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

गुरबक्श सिंह खालसा लंबे समय से भारत की विभिन्न जेलों में सजा पूरी कर चुके सिख कैदियों की रिहाई को लेकर लड़ाई लड़ रहे थे। कुछ साल पहले उन्होंने मोहाली के गुरुद्वारे में लंबा अनशन किया  था तब उन्होंने अकाल तख्त के ज्ञानी गुरबचन सिंह के द्वारा बन्दी सिखों की जल्द आजादी के भरोसे पर भूख हड़ताल खत्म की थी।

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उसके बाद 2014 में अंबाला के गुरुद्वारा लखनौर साहिब में 65 दिन का अनशन किया था। उस समय सरकार और प्रशासन के दबाव और जेल में सजा पूरी कर चुके सिखों की जल्द रिहाई की बात के भरोसे के साथ अनशन खत्म किया था। 3 साल बाद भी कोई ठोस कार्य न होने से व काफी हताश चल रहे थे। कुछ दिन पहले गुरबक्श सिंह खालसा ने अपने पैतृक गांव ठसका अली में दोबारा अनशन पर बैठे थे।

सिख संगत के दबाव में आकर पुलिस ने एस एच ओ इस्माईलाबाद और एस एच ओ झांसा को सस्पेंड कर लाइन हाजिर किया है। अब देखना यह होगा कि  गुरबक्श सिंह खालसा की मौत के बाद देश की विभिन्न जेलों में सजा पूरी कर चुके सिख कैदियों की रिहाई हो पाएगी या नहीं।

HBN


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