रिश्तों के चक्कर में तबाह हुए दो संपन्न परिवार, आज मिला महिला साक्षी का भी शव ,देखें पूरी खबर

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देश के तीसरे नंबर के चावल निर्यातक रोहित गर्ग का करीब 59 घंटे बाद शनिवार को सोनीपत के सटावली गांव के पास दिल्ली पैरलल नहर में शव मिल गया था वहीं आज रविवार सुबह 11 बजे पानीपत के नारायणा गांव के पास नहर से रोहित की महिला मित्र साक्षी का भी शव मिल गया है शव मिलते ही मॉडल टाउन स्थित गर्ग परिवार की कोठी नंबर-678 में मातम छा गया ! अनैतिक रिश्तों के चक्कर में दो संपन्न परिवार तबाह हो गए ! रोहित और साक्षी दोनों के परिजन आहत हैं, इनकी मौत उन्हें उम्र भर कचोटती रहेगी !

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रोहित गर्ग और साक्षी असंध नाका चौकी के पास श्मशान भूमि से 30 मीटर दूर नहर में कूदे थे। विडंबना है कि शनिवार शाम को रोहित का उसी श्मशान भूमि में अंतिम संस्कार हुआ। बड़े बेटे वेदांत ने पिता के शव को मुखाग्नि दी। रोहित की अस्थियां रविवार को हरिद्वार में विसर्जित की जाएंगी।

बताया जा रहा है कि रोहित गर्ग का शव मिलने के बाद गोताखोर नहर से निकल आए थे। उन्होंने साक्षी की तलाश नहीं की। दूसरे जिलों से आए गोताखोर चले गए। शनिवार दोपहर दो बजे के बाद साक्षी के पति विवेक अपने साथियों के साथ नहर पर पहुंचे। उन्होंने गोताखोरों से साक्षी को तलाशने की गुहार लगाई। स्थानीय गोताखोरों के सहयोग से साक्षी की तलाश की गई। रविवार सुबह 11 बजे पानीपत समालखा के नारायणा गांव के पास दिल्ली पैरलल नहर से साक्षी का शव मिला।

मॉडल टाउन में राजकीय गल्र्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल के पीछे कोठी नंबर 591-बी साक्षी बासिल की है। यहां पर सन्नाटा पसरा है। कोठी में साक्षी के बच्चे और बुजुर्ग महिला थीं। साक्षी को एक बेटा व एक बेटी है। उन्होंने मीडिया से दूरी बना रखी थी। बता दें कि साक्षी भी रोहित गर्ग के साथ नहर में कूदी थीं।

एक तरफ जहां साक्षी की कोठी पर सन्नाटा पसरा है वहीं रोहित की कोठी पर संवेदना जताने शहर के नामचीन लोगों का तांता लगा रहा। कोठी और असंध रोड स्थित श्मशाम भूमि के बाहर नहर पर वाहनों की कतार लगी रही। इससे जाम भी लग गया। रोहित के अंतिम संस्कार में परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार, विधायक महीपाल ढांडा, भाजपा के जिला अध्यक्ष प्रमोद विज, पूर्व विधानसभा स्पीकर सतबीर कादियान, कांग्रेस नेता वीरेंद्र उर्फ बुल्लेशाह, गोशाला सोसाइटी के प्रधान रामनिवास गुप्ता पहुंचे।

चर्चा रही कि रोहित गर्ग ट्रिपल डब्ल्यू (वाइन, वूमन और वेल्थ) के फेर में फंस गए थे। बेटे वेदांत व आभास लंदन में पढऩे चले गए। पत्नी ममता अकेली थीं। इससे रोहित को रोकने-टोकने वाला कोई नहीं था। इसलिए वे अक्सर पार्टी करके देर रात घर लौटते थे। उन्होंने शोहरत कमा ली, लेकिन इज्जत नहीं बचा पाए। वहीं दोस्तों में चर्चा थी कि रोहित कभी अपनी जान नहीं दे सकता था उन्होंने तो महिला को बचाने के लिए नहर में छलांग लगाई।

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