व्रत, पर्व और कथा प्रवचनों को केवल उत्साहपूर्ण ही नहीं अर्थ पूर्ण भी बनाना चाहिए : स्वामी दिव्यानंद जी ‘भिक्षु’

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श्री राम कृष्ण संकीर्तन मंडल शिवपुरी अर्जुन गेट करनाल द्वारा एसडी लिटिल एंजेल्स स्कूल ग्राऊंड न्यू हाऊसिंग बोर्ड सेक्टर 13 एक्सटैंशन में आयोजित श्री हनुमान कथा का शुभारंभ करते हुए पूज्य गुरूदेव गीता ज्ञानेश्वर डॉ. स्वामी दिव्यानंद जी महाराज ने कहा कि आध्यात्मिक अनुष्ठान किसी भी रूप में क्यों न हो, बड़े गंभीरता से लेना चाहिए। और श्री हनुमान जी की कथा जिसे स्वयं प्रभु राम सुनना चाहते हैं और अपने अवध वासियों को भी सुनाना चाहते हैं और इसलिए ताकि उनके भीतर में हनुमान जी के सद्गुण आ सकें।

सुविधाओं के नाम पर केवल सम्पत्ति देना, प्रजा के सारे लोग प्रसन्न तो हो जाएंगे, किंतु तृप्त नहीं हो सकेंगे। हनुमान कथा सद्गुणों से भरी कथा है, उनके गुणों को स्वीकार कर अपना जीवन सफल बनाए। आज प्रात: ध्वजारोहण हुआ। रमेश नागपाल, दिनेश नागपाल द्वारा सपरिवार महाराज जी के सानिध्य में ध्वज पूजन हुआ। शाम के सत्संग कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में रामस्वरूप पोपड़ा उपस्थित रहे। महाराज जी ने प्रवचन करते हुए कहा कि सद्गुरुदेव हमारी आध्यात्मिक आवश्यकता है। केवल सामाजिक अथवा राजनीतिक नहीं।

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हमारा सद्गुरुदेव का शिष्य होना एक आध्यात्मिक उपलब्धि के लिए साधक हो जाना है। उनके द्वारा दिया गया उपदेश या बताए गए व्रत अनुष्ठान इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए होते हैं। किसी परंपरा पूर्ति या मनोरंजन या फिर समय व्यतीत करने के लिए नहीं, किंतु लगता है कि आजकल कुछ ऐसा अधिक होने लग गया है। मानो गुरूदेव हमारी किसी राजनीतिक इच्छा प्राप्ति के साधन बनते जा रहे हों या बस कुछ सामाजिक समस्याओं का समाधान करने के लिए।

लगता है तभी कथा प्रवचन सत्संग का भी आध्यात्मिक महत्व कम हो रहा है और इसलिए जीवन में लोगों के जो रूपांतरण होना चाहिए, वह नहीं हो पा रहा। कोई सोचता भी नहीं कि शास्त्र वचन के अनुसार चौरासी लाख योनियों के बाद तो मानव तन मिला, वह भी भक्तों संतों के घर, जहां हमें सत्संग मिला, जैसे इतनी बड़ी करोड़ों-करोड़ों की संख्या वाले देश में किसी को उन क्रिकेट के 11 खिलाडिय़ों में चुना जाए, जो अंतर्राष्ट्रीय टीम हो, मैच भी अपने देश में और पिच भी मर्जी की।

जहां जीत की सारी संभवनाएं हों और हम ढंग से न खेल कर हारे जा रहे हों। ऐसे ही मानव जीवन प्राप्त होकर सत्संग और वह भी हनुमान कथा के रूप में और हम उसे केवल मनोरंजन बना लेवें तो समझो जीवन की बाजी हम हार कर ही जाएंगे।

प्रधान सुरेंद्र भुटानी, पूर्णचंद मुटरेजा, संजय बुधीजा, विजय चावला, अशोक कुमार, अमरदास, श्रीमती राजरानी मुकुल, बहादुर चन्द सचदेवा, ओम प्रकाश बिरमानी, श्रीमति रीतू गुप्ता, सविता गान्धी, रेखा गुप्ता, श्रीमती प्रेम लता शर्मा, प्रवेश शर्मा, रामस्वरूप पोपड़ा, बलबीर सिंह चोपड़ा, मीडिया प्रभारी सुभाष गुरेजा, शाम लाल छाबड़ा, राधेशाम सरदाना, मोहन लाल सुखीजा, शाम सुंदर मदान, परमजीत ढींगड़ा ने भी आरती करके आशीर्वाद लिया।

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