नीलोखेड़ी से पांचवें आजाद विधायक बने धर्मपाल गोंदर ,भाजपा से बागी होकर आजाद लड़े थे चुनाव ,देखें कौन है धर्मपाल गोंदर

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करनाल की विधानसभा नीलोखेड़ी से आजाद विधायक के रूप में 1968 में पहली बार चंदा सिंह विधायक बने थे। अब यहां से पांचवीं बार आजाद धर्मपाल गोंदर ने जीत दर्ज की। इससे पहले इनेलो के मामू राम गोंदर 2009 में विधायक बने थे। इसके बाद यह क्षेत्र चर्चा में आया। हालांकि जुंडला से विधायक रही मीना रानी ने भी गोंदर गांव से मतदाता रही है। वर्ष 2014 के चुनावों में पहली बार भाजपा का कमल खिला तो 1967 में हुए सबसे पहले चुनावों में बीजेएस प्रत्याशी रहे एस राम के सिर पर जीत का सेहरा बंधा था।

हालांकि अगले ही वर्ष यहां से आजाद प्रत्याशी के तौर पर चंदा सिंह को मौका दिया तो इसके बाद तीन बार आजाद प्रत्याशियों को ही नेतृत्व करने की बागडोर सौंपी। पहली बार यहां वर्ष 2009 के चुनाव आरक्षित क्षेत्र के तौर पर हुए। वर्ष 2014 में यहां से भाजपा के भगवानदास कबीरपंथी 58354 वोटों के साथ विजयी रहे थे। 2004 में नौकरी छोड़ भाजपा से जुड़े तो 2009 में लड़ा था चुनाव

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विधायक बने धर्मपाल गोंदर का जन्म 10 जून 1957 को हुआ था। 12वीं तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद कृषि विभाग में ड्राफ्ट मैन के पद पर नौकरी करने लगे। बीस साल तक नौकरी करने के बाद नौकरी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली और बिजेनस शुरू किया। 2004 में दिल्ली के मुख्यमंत्री साहब सिंह वर्मा के विचारों से प्रभावित कर भाजपा में शमिल हो गए। 2009 में भाजपा ने उन्हें नीलोखेड़ी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव हार गए।

2010 से 2015 तक भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश सचिव रहे। वे अनुसूचित मोर्चा के प्रदेश कार्यकारणी के सदस्य रहे। इस बार भी वे पार्टी के टिकट के लिए प्रबल दावेदार थे, लेकिन ऐन वक्त पर उनका टिकट कट गया, जिसके बाद वे आजाद प्रत्याशी के तौर पर मैदान में आए।

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