करनाल में किसानो ने उपायुक्त की उपस्थिति में पराली को आग ना लगाने का लिया संकल्प

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करनाल में किसानो ने उपायुक्त की उपस्थिति में पराली को आग ना लगाने का लिया संकल्प, फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कृषि यंत्रो के प्रयोग और कृषि विविधीकरण को अपनाने पर सहमति दिखाई।

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फसल अवशेषो को सर्वाधिक आग लगाने वाले गांवो में सम्मलित रहे संगोही गाँव के सरपंच केहर सिंह के नेतृत्व में आज बहुत से किसानो ने उपायुक्त विनय प्रताप सिंह की उपस्थिति में संकल्प लिया कि वे चालू सीजन में स्वयं भी और दूसरे किसानो को भी फसल अवशेष अथवा पराली में आग ना लगाने के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ इस बात के लिए प्रेरित करेंगे कि वे कस्टम हायरिंग सेंटरो से कृषि मशीने वाजिब किराए पर लेकर फसल अवशेष प्रबंधन को अपनाएं।

उपायुक्त संगोही में वहां के लंबरदार धन सिंह के फार्म हाऊस पर किसानो से रूबरू थे। अपने दौरे में उन्होंने प्रगतिशील किसान धन सिंह लंबरदार के खेत में कृषि यंत्रो के प्रयोग से फसल अवशेष प्रबंधन का प्रदर्शन भी देखा। उप कृषि निदेशक डॉ. आदित्य प्रताप डबास भी इस मौके पर मौजूद रहे।

किसानो से संवाद करते हुए उपायुक्त ने उन्हें बताया कि किसानो की आय दोगुनी करने के लिए सरकार की ओर से गत वर्ष नई सेक्टर स्कीम, प्रोमोशन ऑफ एग्रीकल्चरल मैकेनाईजेशन फॉर इन-सीटू मैनेजमेंट ऑफ क्रोप रेजीड्यू लागू की थी, इसका मकसद भूमि, जल एवं पर्यावरण बचाने के साथ-साथ फसलो के अवशेष ना जलाने का है। इस स्कीम में किसान समूह बनाकर और व्यक्तिगत तौर पर सब्सिडी के साथ कृषि मशीनो को खरीद सकते हैं।

करनाल जिला में दो वर्षों के दौरान ऐसे 260 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित हो चुके हैं। दूसरी ओर व्यक्तिगत स्तर पर भी करीब 650 किसानो ने कृषि यंत्रो को खरीदा है और उनका प्रयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीएचसी से कृषि यंत्र लेकर किसानो ने जिस तरह से अपने खेतो में फसल अवशेष प्रबंधन को अपनाया है, उससे आग लगाने के मामलो में 45 प्रतिशत की गिरावट आई है।

उन्होंने कहा कि जो प्रवृति लम्बे समय से चली आ रही है, उसे बदलने में समय तो लगेगा, लेकिन इस प्रगति को देखते हुए यह उम्मीद की जा सकती है कि इस वर्ष फसल अवशेषो में आग लगाने के मामले कम से कम रह जाएंगे।

उन्होंने किसानो को समझाया कि हालांकि फसल अवशेषो में आग लगाने के खिलाफ जुर्माना व एफ.आई.आर. का प्रावधान किया गया है, लेकिन जुर्माना कोई हल नही। इससे भी ज्यादा घातक है, आग लगाने से जमीन की सेहत को खराब करना, जिसे ठीक करने के लिए किसान का ज्यादा खर्चा आता है।

जब किसान इस बात को समझेंगे, तो वे आग लगाने की प्रवृति से तौबा करने लगेंगे। उन्होंने किसानो को एक ओर बात बताई और कहा कि फसल अवशेषो में आग हरियाणा में लगती है और उसकी चर्चा दिल्ली में होती है, जिससे इस प्रदेश के किसानो को दोषी ठहराने के साथ-साथ प्रदेश की बदनामी भी होती है, हमें इससे छुटकारा लेना है।

किसानो से मेरी अपील है कि अबकी बार दिल्ली में जब इस बात पर चर्चा हो तो उसमें करनाल जिला और संगोही गांव का नाम ना आए तो आप सभी बधाई के पात्र होंगे। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत तौर पर मशीन की खरीद महंगी पड़ती है, समूह में शामिल किसानो को इसके लिए कम खर्च करना पड़ता है।

जो किसान महंगे दामो पर मशीन नहीं खरीद सकते, वे सीएचसी से सरकार द्वारा निर्धारित वाजिब किराए पर लेकर उसका प्रयोग कर सकते हैं। वैसे भी ऐसी मशीनो की जरूरत साल में केवल दो बार ही यानि फसल कटाई के सीजन में रहती है।
इसके पश्चात उपायुक्त ने किसानो के साथ प्रगतिशील किसान व लंबरदार धन सिंह की खेती की ओर रूख कर, वहां हाल ही में धान कटाई से खाली हुए एक खेत में कृषि मशीनो से फसल अवशेष प्रबंधन का प्रदर्शन देखा।

सबसे पहले मल्चर से पराली अवशेषो को काटकर उसके टुकड़े किए गए, और फिर उसे रोटा वेटर व रिवर्सिबल प्लो से जमीन में अच्छी तरह मिलाया गया। धान कटाई के बाद खेत में गेहूॅ की सीधी बिजाई के लिए हैपी सीडर मशीन का प्रदर्शन भी किया गया। इस अवसर पर गांव के सरपंच और कुछ प्रगतिशील किसानो ने उपायुक्त के सामने अपनी-अपनी राय रखी।

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