करनाल ब्रेकिंग न्यूज : सरकारी स्कूलों में बनने वाले नए भवनों का निर्माण अब नई कार्यप्रणाली के तहत बनेगा। स्कूलों के निर्माण में अब बिना इंजिनियर के कार्य नहीं होगा। इसके लिए नई कार्यप्रणाली को लागू किया गया है। सरकारी स्कूलों में नए भवन, अतिरिक्त कक्ष, प्रयोगशालाएं, शौचालय, चारदीवारी और अन्य निर्माण कार्यों की प्रक्रिया अब पूरी तरह बदल जाएगी। माध्यमिक शिक्षा महानिदेशालय ने सिविल और इंजीनियरिंग कार्यों के लिए नई कार्यप्रणाली (New methodology implemented for building construction in schools) लागू कर दी है। इसके तहत पहली से आठवीं और नौवीं से बारहवीं तक की कक्षाओं के निर्माण कार्यों के लिए अलग-अलग वित्तीय स्वीकृति दी जाएगी, जबकि निर्माण कार्य के लिए निविदा एक ही जारी होगी। विभाग का मानना है कि इससे बजट का पारदर्शी उपयोग होगा और निर्माण कार्यों की निगरानी भी अधिक प्रभावी होगी।
सीधे मुख्यालय नहीं भेजी जाएगी मांग
इस नई कार्यप्रणाली (government schoolo me hogi nyi vyavstha lagu) के अनुसार किसी भी स्कूल में निर्माण कार्य की मांग को सीधे मुख्यालय नहीं भेज सकेंगे। इसके लिए सबसे पहले स्कूल का प्राचार्य हरियाणा स्कूल शिक्षा परिषद (Haryana School Education Parisad) के जूनियर इंजीनियर के साथ मिलकर इसकी पूरी रूपरेखा तय करेंगे। उसके बाद एसडीओ उसकी तकनीकी जांच करेगा। इससे होगा ये कि तकनीकी स्तर पर जो कमियां होगी वो पहले ही दूर हो जाएगी। जिससे विभाग को दोबारा वापिस भेजने की या फाइल अटकाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
दो हिस्सों में तैयार होगी लागत
यदि किसी (haryana government school latest update) वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (Senior Secondary School haryana) में पहली से बारहवीं तक की कक्षाएं संचालित हैं तो निर्माण कार्य की लागत दो हिस्सों में तैयार होगी। पहली से आठवीं तक के निर्माण का खर्च मौलिक शिक्षा के बजट से और नौवीं से बारहवीं तक के निर्माण का खर्च माध्यमिक शिक्षा के बजट से जारी होगा। हालांकि दोनों कार्यों के लिए टेंडर एक साथ जारी की जाएगी।
गलत जानकारी देने पर स्कूल प्राचार्य होगा जिम्मेदार
अब प्रत्येक निर्माण प्रस्ताव के साथ स्थल की व्यवहार्यता रिपोर्ट, नक्शा, भवन की वर्तमान स्थिति, विद्यार्थियों की संख्या, उपलब्ध कमरों का विवरण और वास्तविक आवश्यकता का रिकॉर्ड देना अनिवार्य होगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि तकनीकी कमी या गलत जानकारी मिलने पर संबंधित स्कूल प्राचार्या, इंजीनियर और जिला अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
पिछले साल भेजे गए प्रस्ताव में मिली थी गलतियां
विभाग के(Haryana latest news update) अनुसार पिछले साल भेजे गए निर्माण प्रस्ताव में कई तकनीकी गलतियां मिली। कई प्रस्ताव पुराने दर निर्धारण के आधार पर तैयार किए गए, कहीं स्थल का नक्शा अधूरा था तो कहीं फिजिबिलिटी रिपोर्ट नहीं थी। कई मामलों में जीएसटी (GST), मूल्य वृद्धि और एस्केलेशन चार्ज (Escalation Charge) भी शामिल नहीं किए गए थे। इसी वजह से कई प्रस्ताव निरस्त कर नए प्रारूप में दोबारा भेजने के निर्देश दिए गए थे। अब इसी व्यवस्था को स्थायी रूप से लागू कर दिया गया है।
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