- बिना रुके दौड़ रहे वाहन, हजारों वाहनों का कट रहा टोल
करनाल ब्रेकिंग न्यूज : 22 जून दोपहर 2 बजे से बसताड़ा टोल पर एमएलएफएफ सिस्टम शुरू हो चुका है। अब टोल से बिना रुके वाहन दौड़ रहे है, रोजाना हजारों वाहनों का टोल कट रहा है, जाम की समस्या दूर हो चुकी है। जैसे ही वाहन गेंट्री के नीचे से गुजरता है, उसका टोल अपने आप कट जाता है और इसकी सूचना मोबाइल पर मैसेज के जरिए मिल जाती है। बिना टोल दिए यहां से निकलना लगभग नामुमकिन हो गया है। टोल प्रबंधन से जुड़े ऑप्रेशन मैनेजर प्रदीप मलिक के अनुसार, रोजाना करीब 60 से 70 हजार वाहन इस टोल से गुजरते हैं। इनमें से प्रतिदिन लगभग 6 से 7 हजार वाहनों को ई-नोटिस जारी किए जा रहे हैं। जिन वाहनों के फास्टैग में बैलेंस कम होता है या फास्टैग ब्लॉक होता है, उन्हें यह नोटिस भेजा जाता है।
72 घंटे में भुगतान नहीं तो दोगुना होगा चार्ज
ई-नोटिस मिलने के बाद वाहन चालक को 72 घंटे के भीतर टोल जमा करना होता है। अगर तय समय में भुगतान नहीं किया गया तो टोल शुल्क दोगुना हो जाता है। इसके साथ ही वाहन का फास्टैग ब्लैकलिस्ट कर दिया जाता है, जो तब तक चालू नहीं होता जब तक पूरा बकाया नहीं चुकाया जाता।
जाम से मिलेगा छुटकारा
मल्टी लेन फ्री फ्लो सिस्टम लागू होने के बाद करनाल के बसताड़ा टोल प्लाजा की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। जहां पहले वाहनों की लंबी कतारें लगती थीं और जाम की स्थिति बनी रहती थी, अब वहीं वाहन बिना रुके तेज रफ्तार में गुजर रहे हैं।
टोल कटने की पूरी प्रक्रिया हाईटेक कैमरों और सेंसर के जरिए अपने आप हो रही है, जिससे वाहन चालकों को रुकने की जरूरत नहीं पड़ रही। जिससे टाइम और फ्यूल दोनों ही बच रहे है। ऐसे में वाहन चालकों को किसी तरह की दिक्कत न हो, इसके लिए लेन में लगे कंक्रीट बेरियर्स को भी हटाने का काम शुरू कर दिया गया है।
कंक्रीट बेरियर हटाने का काम शुरू
एमएलएफएफ सिस्टम लागू होने के बाद अब टोल प्लाजा का ढांचा भी धीरे-धीरे बदला जा रहा है। बूथ लेन में लगे कंक्रीट बेरियर हटाने का काम शुरू कर दिया गया है। दुर्घटना की आशंका को खत्म करने और वाहनों की रफ्तार बनाए रखने के लिए हाइड्रा मशीन की मदद से इन बेरियर को हटाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, पहले इन बेरियर को एक जगह इकट्ठा किया जाएगा और बाद में अन्य जगह इस्तेमाल किया जाएगा। फिलहाल केवल बेरियर हटाने का काम चल रहा है, जबकि टोल बूथ और पूरा स्ट्रक्चर हटाने का काम करीब 6 महीने बाद शुरू हो सकता है।
350 रुपए मासिक पास से लोकल चालकों में नाराजगी
एमएलएफएफ सिस्टम लागू होने के बाद अब लोकल वाहन चालकों को भी टोल देना पड़ रहा है। पहले लोकल आईडी के आधार पर वाहन मुफ्त में गुजर जाते थे, लेकिन अब फास्टैग अनिवार्य कर दिया गया है। 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों के लिए 350 रुपए का मासिक पास जरूरी है। इस पास से सालाना करीब 4200 रुपए का खर्च आता है, जिससे स्थानीय लोग नाराज हैं। उनका कहना है कि उन्हें अपने ही क्षेत्र में आने-जाने के लिए टोल देना पड़ रहा है।
लंबी दूरी वालों के लिए 3075 का फास्टैग विकल्प
जो वाहन चालक रोजाना करनाल और पानीपत के बीच सफर करते हैं या लंबी दूरी तय करते हैं, उनके लिए 3075 रुपए का विशेष फास्टैग विकल्प उपलब्ध है। इसमें 200 ट्रिप मिलती हैं, लेकिन अगर इसी फास्टैग का उपयोग बसताड़ा टोल पर भी किया जाए तो ये ट्रिप करीब 100 दिनों में ही खत्म हो जाती हैं। ऐसे में अगर वाहन चालक 350 रुपए वाला लोकल पास भी बनवाता है तो उसे सालाना करीब 7200 रुपए खर्च करने पड़ते हैं।
2000 रुपए सालाना पास की तैयारी, फिर भी पूरी राहत नहीं
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने संकेत दिए हैं कि आने वाले महीने में लोकल वाहन चालकों के लिए करीब 2000 रुपए सालाना का पास लागू किया जा सकता है, जिसमें अनलिमिटेड ट्रिप मिलेंगी। हालांकि, रोजाना सफर करने वाले लोगों का कहना है कि इससे भी पूरी राहत नहीं मिलेगी, क्योंकि उन्हें लोकल और नेशनल दोनों तरह के पास लेने पड़ेंगे। इस स्थिति में उनका कुल खर्च करीब 5200 रुपए सालाना तक पहुंच सकता है।
लोकल लोगों की मांग- पास पूरी तरह फ्री किया जाए
स्थानीय वाहन चालकों ने सरकार से मांग की है कि लोकल पास को पूरी तरह मुफ्त किया जाए, ताकि उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। उनका कहना है कि रोजमर्रा के काम के लिए टोल देना उनके लिए परेशानी का कारण बन रहा है। बसताड़ा टोल पर लागू नई व्यवस्था ने जहां यातायात को तेज और सुगम बनाया है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों के लिए नई आर्थिक चुनौती भी खड़ी कर दी है।
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