- मंत्री ने जिलेवार रिपोर्ट मांगी
करनाल ब्रेकिंग न्यूज : हरियाणा में खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही यूरिया और डीएपी की खपत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष 1 अप्रैल से 10 जून के बीच राज्य में यूरिया की खपत पिछले वर्ष की तुलना में करीब 56 हजार मीट्रिक टन अधिक रही।
बढ़ती खपत को देखते हुए कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने अधिकारियों को उर्वरक बिक्री की विस्तृत जांच करने और निर्धारित सीमा से अधिक खाद बेचने वाले डीलरों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
18% से ज्यादा बढ़ी यूरिया की खपत
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल से 10 जून 2026 के दौरान राज्य में 3,56,806 मीट्रिक टन यूरिया की खपत हुई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 3,00,774 मीट्रिक टन था। यानी एक साल में लगभग 56,032 मीट्रिक टन की वृद्धि दर्ज की गई। इसी तरह डीएपी की खपत भी बढ़ी है। पिछले वर्ष जहां 48,673 मीट्रिक टन डीएपी का उपयोग हुआ था, वहीं इस वर्ष यह बढ़कर 54,485 मीट्रिक टन पहुंच गई।
मंत्री ने मांगी जिलेवार रिपोर्ट
कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के कृषि उपनिदेशकों की बैठक लेकर उर्वरक बिक्री की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन डीलरों ने निर्धारित सीमा से अधिक यूरिया और डीएपी की बिक्री की है, उन्हें नोटिस जारी किए जाएं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि संबंधित डीलर संतोषजनक जवाब नहीं दे पाते हैं तो उनके लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई की जाएगी।
करनाल में सबसे ज्यादा यूरिया की खपत
जिलेवार आंकड़ों में करनाल सबसे आगे रहा, जहां किसानों ने 42,252 मीट्रिक टन यूरिया का उपयोग किया। इसके बाद सिरसा 35,196 मीट्रिक टन, फतेहाबाद 34,519 मीट्रिक टन रहीं। वहीं, हिसार में यूरिया की खपत में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई। यहां पिछले वर्ष 13,473 मीट्रिक टन यूरिया की खपत हुई थी, जो इस वर्ष बढ़कर 20,601 मीट्रिक टन पहुंच गई।
एनपीके उर्वरकों की खपत घटी
जहां यूरिया और डीएपी की मांग बढ़ी है, वहीं एनपीके उर्वरकों का उपयोग घटा है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष 18,026 मीट्रिक टन एनपीके की खपत हुई थी, जो इस वर्ष घटकर केवल 8,481 मीट्रिक टन रह गई। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, यमुनानगर क्षेत्र में प्लाईवुड उद्योगों द्वारा यूरिया के संभावित दुरुपयोग को लेकर भी सरकार सतर्क है।
बताया जा रहा है कि किसानों के लिए सब्सिडी दर पर उपलब्ध यूरिया कुछ मामलों में औद्योगिक उपयोग के लिए पहुंच रहा है। यमुनानगर जिले में करीब 250 प्लाईवुड इकाइयां संचालित हैं। इसी कारण सरकार ने हाल के दिनों में यूरिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए विशेष अभियान भी चलाया है।
सरकार की चिंता क्यों बढ़ी
राज्य सरकार लगातार प्राकृतिक खेती और रासायनिक उर्वरकों के कम उपयोग को बढ़ावा दे रही है। इसके बावजूद यूरिया और डीएपी की बढ़ती खपत ने कृषि विभाग की चिंता बढ़ा दी है। विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि बढ़ी हुई मांग वास्तव में खेती की जरूरतों के कारण है या फिर कहीं खाद का दुरुपयोग और डायवर्जन तो नहीं हो रहा।