- जानें- इसका आपके डेली खर्चों, निवेश, ट्रेवल और EMI पर क्या असर पड़ता है?
करनाल ब्रेकिंग न्यूज : अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते भारतीय रुपए पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। सोमवार को डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया ₹95.23 के स्तर पर बंद हुआ।
फरवरी के अंत में शुरू हुई इस जंग के बाद महज तीन महीनों में रुपया करीब ₹5 टूट चुका है, जिससे आपकी रोजमर्रा की जिंदगी, घरेलू बजट और निवेश पर सीधा असर पड़ने वाला है।
युद्ध के 3 महीनों में रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया
रूस-यूक्रेन के बाद अब मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का सीधा असर भारतीय करेंसी पर दिख रहा है। इस साल 28 फरवरी को जब अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू हुआ था, तब रुपया प्रति डॉलर ₹91 के करीब था। इसके बाद कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की बढ़ती कीमतों, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के बाजार से लगातार पैसे निकालने और अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने के कारण रुपए में गिरावट आई। इसके चलते 21 मई को रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर ₹96 प्रति डॉलर पर पहुंच गया था।
पीएम मोदी की अपील, विदेशी मुद्रा भंडार बचाएं
रुपए की सेहत सुधारने और देश के विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) को सुरक्षित रखने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से एक खास अपील की है।
पीएम मोदी ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे आने वाले एक साल तक सोने की खरीदारी न करें, विदेशों में घूमने जाने से बचें और पेट्रोल-डीजल व गैस की खपत में जितनी हो सके कमी लाएं।
रसोई का बजट बिगड़ेगा, फल-सब्जियां महंगी होंगी
कोटक सिक्योरिटीज के कमोडिटी एंड करेंसी रिसर्च हेड अनिंद्य बनर्जी के मुताबिक, रुपए की गिरावट का असर आम परिवारों पर तीन अलग-अलग रास्तों से पहुंचेगा…
पेट्रोल पंप पर: सरकार भले ही एक्साइज ड्यूटी में बदलाव कर आम जनता को राहत देने की कोशिश करे, लेकिन एलपीजी (LPG), सीएनजी (CNG) और डीजल से चलने वाले मालभाड़े पर इसका भारी दबाव दिखेगा।
किचन के बजट पर: भारत अपनी जरूरत का करीब 60% खाने का तेल (पाम, सोयाबीन, सनफ्लावर) विदेशों से आयात करता है। डॉलर महंगा होने से खाना पकाने के तेल का हर डिब्बा अब महंगा होकर रसोई तक पहुंचेगा।
ट्रांसपोर्ट और सामान पर: भारत में ट्रक, रेलवे और डिलीवरी गाड़ियां मुख्य रूप से डीजल से चलती हैं। मालभाड़ा बढ़ने से मंडियों में सब्जियां, दूध की सप्लाई और ई-कॉमर्स वेबसाइट्स से मंगाए जाने वाले ऑर्डर महंगे हो जाएंगे। इसके अलावा विदेशों से आने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स, स्मार्टफोन और एसी (AC) भी महंगे होंगे।
विदेश यात्रा का बजट 20% तक बढ़ा, घरेलू सफर भी महंगा हुआ
डॉलर के मुकाबले रुपए के टूटने से विदेश घूमना काफी महंगा हो चुका है। फ्लाइट टिकट, होटल बुकिंग, शॉपिंग और वहां खाने-पीने के लिए अब ज्यादा पैसे चुकाने पड़ रहे हैं। उदाहरण के लिए, यदि आप अमेरिका की ट्रिप के लिए 5,000 डॉलर का बजट बनाते हैं, तो पहले ₹80 के रेट पर यह ₹4 लाख बैठता था, लेकिन अब ₹96 के रेट पर यह बढ़कर ₹4.80 लाख हो जाएगा।
रुपए के गिरने का असर घरेलू टूरिज्म पर भी होता है। जब विमानन और ट्रांसपोर्ट कंपनियों को रुपए की कमजोरी से नुकसान होता है, तो वे देश के अंदर भी हवाई टिकटों के दाम और होटलों के रेट बढ़ा देती हैं।
महंगाई बढ़ने पर बढ़ सकती है बैंकों की EMI, पढ़ाई भी महंगी
भारत अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। तेल महंगा होने से जब देश में महंगाई बढ़ने लगती है, तो रिजर्व बैंक (RBI) को बीच में दखल देना पड़ता है और वह रेपो रेट बढ़ा देता है। रेपो रेट बढ़ते ही बैंक लोन की ब्याज दरें बढ़ा देते हैं, जिससे फ्लोटिंग रेट वाले होम और कार लोन की EMI बढ़ जाती है। हालांकि, भारत में अभी ऐसी स्थिति नहीं है, लेकिन भविष्य में यह संकट आ सकता है।
इसके अलावा विदेशों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों की ट्यूशन फीस, हॉस्टल और लिविंग कॉस्ट रुपए में कंवर्ट होने पर काफी बढ़ गई है, जिससे उन्हें टॉप-अप लोन लेना पड़ रहा है। विदेशी करेंसी में क्रेडिट कार्ड से खर्च करने पर बैंकों द्वारा करीब 3.5% फॉरेक्स मार्कअप और जीएसटी वसूला जा रहा है। हालांकि, विदेशों में बैठकर डॉलर में कमाने वाले एनआरआई (NRI) जो भारत में रुपए में लोन चुका रहे हैं, उन्हें डॉलर के मुकाबले कम पैसे देने पड़ रहे हैं।
मौजूदा हालात में क्या करें आम लोग?
महीने का बजट रीव्यू करें: फ्यूल, इलेक्ट्रॉनिक्स और लग्जरी प्रोडक्ट्स पर होने वाले गैर-जरूरी खर्चों को तुरंत ट्रैक करें और फिजूलखर्ची पर रोक लगाएं।
निवेश में विविधता लाएं: पूरा पैसा एक जगह लगाने के बजाय इक्विटी, गोल्ड, फिक्स्ड इनकम और इंटरनेशनल फंड्स में बांटकर निवेश करें।
इमरजेंसी फंड तैयार रखें: आर्थिक अनिश्चितता के इस दौर में कम से कम 6 से 12 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड अलग से मेंटेन करें।